रेबीज (Rabies) और जानवरों के काटने के लिए होम्योपैथिक इलाज की एक कम्पलीट गाइड
जानिए कुत्ते, बिल्ली या किसी भी जानवर के काटने और रेबीज (Rabies) से बचाव के लिए सबसे असरदार होम्योपैथिक दवाओं के बारे में। घाव भरने और संक्रमण रोकने में Lyssinum और Ledum जैसी दवाएं कैसे काम करती हैं, विस्तार से पढ़ें।

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परामर्श शुरू करेंरेबीज, जिसे पहले हाइड्रोफोबिया (hydrophobia) यानी पानी से डरना कहा जाता था, इंसान के नर्वस सिस्टम (nervous system) के लिए एक बहुत बड़ा और भयानक खतरा है। रेबीज का इनक्यूबेशन पीरियड (बीमारी पनपने का समय) आमतौर पर 2 से 3 महीने का होता है, लेकिन यह 1 हफ्ते से लेकर 1 साल तक भी हो सकता है। इसलिए सही समय पर होम्योपैथिक इलाज शुरू करना बहुत जरूरी है। डॉ. सैमुअल हैनिमैन के बनाए गए मूल सिद्धांत 'सिमिलिया सिमिलिबस क्यूरेंटुर' (Similia Similibus Curentur - यानी जहर ही जहर को मारता है) के अनुसार, हम सिर्फ बीमारी के नाम का इलाज नहीं करते, बल्कि मरीज के पूरे लक्षणों (symptoms) को देखकर इलाज करते हैं।
जैसे रेबीज के कई अलग-अलग प्रकार होते हैं, वैसे ही हम हर मरीज को एक ही दवा से ठीक नहीं कर सकते। इसके लिए हर केस को अलग तरह से समझना पड़ता है। नीचे कुछ सबसे असरदार दवाओं (Materia Medica) की डिटेल दी गई है, जो रेबीज और जानवरों के काटने की रोकथाम, बचाव (prevention), और इलाज में मदद करती हैं।
तुरंत घाव की देखभाल (Immediate Wound Care) और गुस्सैल जानवरों का काटना
जब किसी मरीज को कोई जानवर काटता है, तो घाव की जगह पर दिखने वाले शुरुआती लक्षण हमें सही दवा चुनने में मदद करते हैं।
Arnica Montana (आर्निका मोंटाना): पागल कुत्तों या अन्य जानवरों के काटने के बाद होने वाले फिजिकल ट्रॉमा (शारीरिक चोट) के लिए यह एक प्राइमरी दवा है। यह तब बहुत काम आती है जब किसी पागल या गुस्सैल जानवर के काटने के बाद मरीज गहरे सदमे (shock) में हो।
Ledum Palustre (लीडम पालस्ट्रे): नुकीले हथियारों या जानवरों के दांतों से होने वाले गहरे घावों (punctured wounds) के लिए यह सबसे बेहतरीन दवा है। लीडम तब सबसे अच्छा काम करती है जब मरीज को ठंडी सिकाई से आराम मिलता है, भले ही घाव वाली जगह छूने में पहले से ही ठंडी क्यों न हो। मरीज के शरीर में अपनी कोई गर्मी (animal heat) नहीं बचती, फिर भी उसे बिस्तर की गर्मी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती। यह टिटनेस (tetanus) को रोकने में भी बहुत असरदार है, खासकर तब जब घाव के आस-पास की मांसपेशियों में फड़कन (twitching) हो।
Hypericum Perforatum (हाइपरिकम परफोरेटम): इसे अक्सर 'नसों का आर्निका' (Arnica of the Nerves) कहा जाता है क्योंकि यह उंगलियों, पैर के अंगूठों और रीढ़ की हड्डी (spine) जैसी नसों से भरी जगहों पर बहुत अच्छा असर करती है। बहुत ज्यादा दर्द होना इसका मुख्य लक्षण है। गहरे घावों के इलाज और लॉकजॉ (lockjaw/tetanus) को रोकने के लिए यह बेहतरीन है।
Echinacea Angustifolia (इचिनेशिया एंगस्टिफोलिया): ब्लड इन्फेक्शन (blood dyscrasia) को ठीक करने के लिए मशहूर यह दवा, पागल जानवरों के काटने और उसके बाद शरीर में फैलने वाले सिस्टमिक इन्फेक्शन को रोकने में बहुत असरदार है।
सबसे बड़ा बचाव (The Great Prophylactic): Lyssinum (Hydrophobinum)
लिसिनम (Lyssinum) रेबीज का एक 'नोसोड' (nosode) है। नोसोड एक खास होम्योपैथिक दवा होती है जो बीमारी वाले टिशू या बीमारी के प्रोडक्ट्स से बनाई जाती है, ताकि शरीर में स्पेसिफिक इम्युनिटी बढ़ सके और अंदरूनी रुकावटें दूर हो सकें। इसे एक पागल कुत्ते की लार (saliva) से, मिल्क शुगर (sugar of milk) के साथ पीसकर (trituration) तैयार किया जाता है।
डॉ. कॉन्सटेंटाइन हेरिंग ने अगस्त 1833 में पहली बार यह लार निकाली थी और उसी साल खुद पर इसका परीक्षण (proving) किया था। लुई पाश्चर के हाइड्रोफोबिया सीरम लाने से बहुत पहले ही, डॉ. हेरिंग ने इस लार को होम्योपैथिक तरीके से पोटेंटाइज (potentize) करके दुनिया को रेबीज का एक सफल इलाज और बचाव का तरीका दे दिया था। पोटेंटाइजेशन (Potentization) प्रोसेस में दवा को बार-बार डाइल्यूट और शेक (succussion) किया जाता है, जिससे उसका जहरीला असर खत्म हो जाता है और उसकी हीलिंग एनर्जी (healing energy) कई गुना बढ़ जाती है।
होम्योपैथी ने सालों से बहुत कम खर्च और बिना किसी तकलीफ के कई मरीजों को सफलतापूर्वक ठीक किया है। पाश्चर जब सिर्फ 8 साल के थे, तब होम्योपैथी में हाइड्रोफोबिनम का इस्तेमाल हो रहा था! एंथ्रेक्स के लिए एंथ्रासिनम, टीबी के लिए ट्यूबरकुलिनम और काली खांसी (whooping cough) के लिए पर्टुसिन जैसी दवाएं इसी सोच का नतीजा हैं।
लिसिनम कुत्ते के काटने के दर्द को खींच निकालती है, और सबसे जरूरी बात—यह मरीज के अंदर का डर खत्म कर देती है। कुत्ते, बिल्ली या किसी भी जानवर के काटने पर लिसिनम के क्लिनिकल रिज़ल्ट्स चौंकाने वाले हैं। यह कुत्ते के काटने से होने वाले सिरदर्द (चाहे कुत्ता पागल हो या नहीं), मेंटल स्ट्रेस से होने वाले पुराने सिरदर्द, और बहते पानी की आवाज या तेज रोशनी से होने वाले सिरदर्द में दी जाती है।
यह दवा घाव के पुराने दर्द को भी ठीक करती है, खासकर जब शराब (wine) पीने से तकलीफ बढ़ जाती हो। इसके अलावा, जिन लोगों को किसी नॉर्मल (बिना रेबीज वाले) कुत्ते ने काटा हो, उनके अंदर पैदा हुए डर (Lyssophobia) को भी यह जड़ से खत्म कर देती है। ऐसे लोग कुत्तों से डरते नहीं हैं, लेकिन उन्हें देखकर उनका पुराना ट्रॉमा ताज़ा हो जाता है।
हाइड्रोफोबिया की 3 क्लासिक दवाएं (The Classic Hydrophobia Triad)
जब मरीज बहुत ज्यादा उग्र (frenzied) हो जाता है, तो हमें बेलडोना (Belladonna), हायोसियामस (Hyoscyamus), और स्ट्रामोनियम (Stramonium) के बीच फर्क समझना होता है।
Belladonna (बेलाडोना): यह डेडली नाइटशेड (Deadly Nightshade) नाम के पौधे से बनती है, जिसमें एट्रोपिन (atropine) होता है। यही वजह है कि इसका नर्वस सिस्टम और म्यूकस मेम्ब्रेन पर इतना गहरा असर होता है। बाकी होम्योपैथिक दवाओं की तरह, इसे भी सबसे छोटी डोज़ में ही देना चाहिए। इसके लक्षणों में नींद न आना, सांस लेने में तकलीफ, और लिक्विड (पानी) पीने की बहुत तेज तड़प (thirst) शामिल है। लेकिन जब मरीज को पानी दिया जाता है, तो वह उसे हिंसक तरीके से झटक देता है। उसका चेहरा लाल रहता है, आंखें फटी और चमकती हुई होती हैं, और प्यास होने के बावजूद पानी पीने से उसे दम घुटने (suffocation) का अहसास होता है। मरीज कुछ भी निगल नहीं पाता। उसमें अपने आस-पास के लोगों को काटने की इच्छा होती है, जो अचानक डर में बदल जाती है। वह हर तरफ थूकना चाहता है, भाग जाना चाहता है और उसका शरीर लगातार हिलता रहता है।
गंभीर न्यूरोलॉजिकल (Neurological) और ऐंठन (Convulsive) की स्थिति
Strychninum Purum (स्ट्रिकनीनम पुरम): टिटनेस और रेबीज के उन गंभीर और आखिरी स्टेजेस की दवा है जहां मौत से पहले भयंकर डर और ऐंठन (spasms) होती है। शरीर की हर एक मांसपेशी (muscle) फड़कने लगती है। बिजली के झटके जैसी कंपकंपी होती है, और शरीर पीछे की तरफ धनुष की तरह मुड़ जाता है (opisthotonos)। झटके इतने तेज़ होते हैं कि कई बार जांघ की हड्डी भी अपनी जगह से खिसक जाती है। मरीज सिर्फ पीठ के बल लेट सकता है, करवट लेते ही उसे दौरे पड़ने लगते हैं। तरल पदार्थ (liquids) पीने की कोशिश करते ही गले में ऐसी ऐंठन होती है कि वह घूंट नहीं भर पाता। रात 8 से 10 बजे के बीच तकलीफ बहुत बढ़ जाती है। क्रोनिक नर्वस सिस्टम की बीमारियों में यह बहुत शानदार काम करती है (जैसे लोकोमोटर अटैक्सिया के एक पुराने मरीज ने 1M पोटेंसी लेने के बाद अपनी व्हीलचेयर छोड़ दी थी)।
Lachesis Mutus (लैकेसिस म्यूटस): यह बुशमास्टर (Bushmaster) नाम के सांप के ज़हर से बनती है, जो तेजी से खून को खराब करने और नर्वस सिस्टम को फेल करने के लिए जाना जाता है। इसके गंभीर मामलों में, मरीज बहुत ज्यादा बोलने (loquacity) के बाद धीरे-धीरे बड़बड़ाने वाली हालत में पहुँच जाता है और उसके शरीर में तेज झटके (tremors) आते हैं। जीभ का कांपना इसका एक खास लक्षण है। गले की मांसपेशियों में ऐंठन (spasms) बहुत कॉमन है, और इसी आधार पर रेबीज में इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है।
Tanacetum Vulgare (टैनासेटम वल्गारे): इसमें रेबीज के सारे गंभीर लक्षण मिलते हैं: सांस की नली में झागदार और खून भरा म्यूकस, डरावने भ्रम (hallucinations), पूरे होश में रहते हुए भी दौरे पड़ना, और शरीर का पीछे की ओर मुड़ना। मरीज के मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकती है, उसे दम घुटने का अहसास होता है, वह लोगों को काटना चाहता है, और जानवरों जैसी भारी, डरावनी आवाजें निकालता है।
Fagus Sylvatica (फेगस सिल्वाटिका): इसमें रेबीज के जहर जैसी ही नसों की जलन (nerve irritation) होती है। मरीज कांपता है, रुक-रुक कर ऐंठन होती है, और शरीर में बहुत ज्यादा अकड़न और ठंडक आ जाती है।
Viscum Album (विस्कम एल्बम): मिस्टलेटो (Mistletoe) पौधे से बनी यह दवा मिर्गी (epilepsy) और रेबीज के दौरे (convulsive stages) दोनों में बहुत असरदार साबित हुई है।
उग्र और अजीबोगरीब लक्षण (Frenzied and Atypical Presentations)
Cantharis Vesicatoria (कैंथारिस वेसिकैटोरिया): यह स्पेनिश फ्लाई (Spanish Fly) नाम के कीड़े से बनती है, जो अंदरूनी जलन और यूरिनरी ट्रैक्ट में इरिटेशन पैदा करती है। मरीज बहुत गर्म महसूस करता है, पागलपन और गुस्से में रहता है। तेज रोशनी, चमकदार चीजें, या गले को छूने भर से उसके दौरे फिर से शुरू हो जाते हैं, बिल्कुल एडवांस रेबीज की तरह। पानी पीने की कोशिश करने पर भी उसे झटके आते हैं। इसके अलावा मरीज में बहुत ज्यादा सेक्सुअल एक्साइटमेंट (erotic action) भी देखने को मिलता है।
Agaricus Muscarius (एगैरिकस मस्कारियस / Amanita): यह तब दी जाती है जब शाम के समय मरीज को अचानक पागलों जैसी, न बुझने वाली भूख लग जाए। पूरे शरीर पर बहुत ज्यादा पसीना आता है, साथ ही कांपना और हाथ-पैरों में बहुत ज्यादा थकावट महसूस होती है।
Ranunculus Sceleratus (रानुनकुलस स्केलेरेटस): इसका असर कुछ-कुछ कुत्तों वाले रेबीज जैसा होता है। मरीज की पूरी बांह पर बड़े-बड़े छाले (blisters) पड़ जाते हैं, बुखार आता है, वह पागलों जैसी बातें करता है, और दिमाग में सूजन (cerebral inflammation) आ जाती है। अगर स्थिति बिगड़ जाए, तो बांह में गैंग्रीन (mortification/gangrene) भी हो सकता है।
Cistus Canadensis (सिस्टस कैनेडेंसिस) & Chromicum Acidum (क्रोमिकम एसिडम): ये दोनों दवाएं हॉस्पिटल गैंग्रीन, तेजी से फैलने वाले अल्सर (phagedenic ulcers), पागल जानवरों के काटने, और गहरे जहरीले घावों के लिए बहुत बढ़िया हैं।
Anagallis Arvensis (एनागैलिस अर्वेन्सिस): इस खास दवा का इस्तेमाल हर तरह के जहर (poisons) का असर काटने (antidote) और खासतौर पर पागल जानवरों के काटने के बाद नर्वस सिस्टम पर होने वाले बुरे असर को रोकने के लिए किया जाता है।
रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, कृपया किसी भी दवा का इस्तेमाल करने से पहले किसी योग्य होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह लें और मेडिकल गाइडलाइन्स का पालन करें।
गंभीर स्थिति का स्वयं उपचार न करें
इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
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