चिकनगुनिया का पूरा सच: इसके गंभीर लक्षण, इतिहास और पारंपरिक उपचार
चिकनगुनिया वायरस की उत्पत्ति, इसके कारण होने वाले गंभीर जोड़ों के दर्द और पारंपरिक होम्योपैथिक उपचारों के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा (जैसे नई वैक्सीन) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में विस्तार से जानें।

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परामर्श शुरू करेंचिकनगुनिया क्या है?
चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है जिसके लक्षण डेंगू बुखार से काफी मिलते-जुलते हैं।
वायरस: यह एक कीट-जनित (कीड़ों से फैलने वाला) वायरस है जो अल्फावायरस (Alphavirus) जीनस से संबंधित है।
खोज: इस वायरस की खोज पहली बार 1953 में पूर्वी अफ्रीका में डेंगू जैसी बीमारी की महामारी के दौरान की गई थी।
वैश्विक फैलाव: अपनी खोज के बाद से, यह दक्षिण भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया गया है, जो अक्सर डेंगू और रक्तस्रावी बुखार (haemorrhagic fever) की महामारियों से जुड़ा होता है।
प्रसार: यह वायरस ले जाने वाले मच्छरों द्वारा मनुष्यों में फैलता है। पूर्वी अफ्रीका में, एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) और एडीज अफ्रीकनस (Aedes africanus) दोनों मच्छर इसके वाहक (vectors) के रूप में कार्य करते हैं।
"चिकनगुनिया" नाम किमाकोंडे (Kimakonde) भाषा से आया है, जिसका अर्थ है "मुड़ जाना या झुक जाना"। यह गंभीर जोड़ों के दर्द से पीड़ित रोगियों की झुकी हुई मुद्रा को दर्शाता है।
इसकी विशिष्ट ऊष्मायन अवधि (incubation period)—यानी मच्छर के काटने और लक्षण शुरू होने के बीच का समय—आमतौर पर 3 से 7 दिनों का होता है।
रोग की प्रगति और लक्षण
यह बीमारी आमतौर पर दो मुख्य चरणों में होती है:
तीव्र ज्वर का चरण (Acute Febrile Phase): बुखार का एक अचानक और अल्पकालिक चरण जो दो से पांच दिनों तक रहता है।
लंबे समय तक चलने वाला जोड़ों का दर्द (Prolonged Arthralgic Phase): बुखार के बाद, रोगियों को जोड़ों में तेज दर्द (arthralgia) होता है जो मुख्य रूप से हाथ-पैरों (extremities) को प्रभावित करता है। यह जोड़ों का दर्द लगातार बना रहता है और हफ्तों, महीनों या कुछ मामलों में सालों तक रह सकता है।
पारंपरिक और होम्योपैथिक उपचार
(निम्नलिखित उपचार और उनके विशिष्ट लक्षणों के लक्ष्य, बुखार और मलेरिया से संबंधित लक्षणों के पारंपरिक/वैकल्पिक उपचार के लिए प्रलेखित हैं।)
1. कॉर्नस फ्लोरिडा (Cornus Florida)
सामान्य लक्षण: शरीर से तरल पदार्थों की कमी और रात में पसीना आने के कारण सामान्य दुर्बलता, लक्षणों के बीच अत्यधिक थकावट, और पूरे शरीर में चिपचिपा पसीना। मरीज को ठंड लगती है लेकिन छूने पर शरीर गर्म लगता है।
बुखार और ठंड लगना: उनींदेपन (सुस्ती) के साथ रुक-रुक कर आने वाला बुखार। ठंड लगना और शरीर गर्म होना दोनों सुस्ती से जुड़े होते हैं।
दर्द: हाथ, छाती और धड़ में न्यूराल्जिक (नसों का) दर्द। शरीर में ऐसी अनुभूति होती है जैसे वह "दो टुकड़ों में टूट गया हो"। विशेष रूप से कुनैन (quinine) लेने के बाद होने वाला सिरदर्द।
पाचन: अपच और कष्टदायक एसिड हार्टबर्न (सीने की जलन)।
अन्य उपयोग: पुराना (क्रोनिक) मलेरिया।
2. कॉर्नस सरसिनाटा (Cornus Circinata)
सामान्य लक्षण: सुबह के समय कमजोरी महसूस होना।
पाचन/लिवर: पेट के ऊपरी हिस्से (pit of stomach) में दर्द के साथ फूला हुआ पेट। हेपेटाइटिस, पीलिया और पुराने लिवर रोग के लिए।
त्वचा/मुंह: लिवर की बीमारी या एप्थस स्टोमेटाइटिस (मुंह के छाले) से जुड़े वेसिकुलर (छाले जैसे) दाने।
अन्य उपयोग: पुराना मलेरिया।
3. हेलियनथस एनुअस (Helianthus Annuus - सूरजमुखी)
सामान्य लक्षण: त्वचा का लाल होना और गर्मी। गर्मी से लक्षण बढ़ जाते हैं और उल्टी होने पर आराम मिलता है।
दर्द: विशेष रूप से बाएं घुटने में आमवाती (Rheumatic) दर्द।
श्वसन/नाक: कोरीज़ा (सर्दी-जुकाम), कटार (बलगम का जमाव), नाक से खून आना (नकसीर), और नाक में मोटी पपड़ी जमना।
पाचन: मतली और उल्टी के साथ पेट पर स्पष्ट प्रभाव। मुंह और ग्रसनी (pharynx) में जमाव और सूखापन। काले मल का आना (लेप्टेंड्रा के समान)। यह प्लीहा (spleen) के उपचार के रूप में कार्य करता है।
अन्य उपयोग: रुक-रुक कर आने वाले बुखार के पुराने मामले।
4. यूपेटोरियम परफोलिएटम (Eupatorium Perfoliatum)
सामान्य लक्षण: सभी अंगों और कार्यों में सुस्ती। शराब की लत (inebriety) से जर्जर हो चुका शरीर। पुराने, क्रोनिक पित्त संबंधी रुक-रुक कर आने वाले बुखार से होने वाला कैचेक्सिया (Cachexia - शरीर का अत्यधिक कमजोर होना)। लक्षणों की स्पष्ट आवधिकता (समय-समय पर दोहराव, आर्स, चाइना, सिड्रॉन के समान)।
दर्द: मलेरिया और इन्फ्लूएंजा जैसी बुखार वाली बीमारियों के साथ हाथ-पैरों और मांसपेशियों में होने वाले दर्द से राहत देता है। हड्डियों के भयंकर दर्द और सूजन वाली सभी स्थितियों के लिए यह एक वरदान है।
इनके लिए सबसे उपयुक्त: "मियास्मेटिक (miasmatic)" क्षेत्रों में रहने वाले रोगी—यानी नदियों, दलदलों और कीचड़ वाले इलाकों के पास के क्षेत्रों के मरीज।
आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा में, चिकनगुनिया को ठीक करने के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा नहीं है। उपचार मुख्य रूप से आराम, शरीर में पानी की कमी न होने देने (hydration), और बुखार तथा दर्द के लिए पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) जैसी ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) दवाओं के माध्यम से लक्षणों को कम करने पर केंद्रित होता है।
स्वास्थ्य अधिकारी एस्पिरिन और नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs जैसे इबुप्रोफेन) का उपयोग तब तक न करने की सख्त सलाह देते हैं जब तक कि डेंगू बुखार के होने की पूरी तरह से पुष्टि न हो जाए या उसे खारिज न कर दिया जाए, ताकि गंभीर रक्तस्राव (bleeding) के जोखिम को रोका जा सके।
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