बच्चों में पिनवॉर्म (चुन्ने) के 5 असरदार होम्योपैथिक उपचार: एक संपूर्ण गाइड
बच्चों में पिनवॉर्म (चुन्ने) के इलाज के लिए शीर्ष 5 होम्योपैथिक दवाओं के बारे में जानें। सुरक्षित और प्राकृतिक राहत पाने के लिए बच्चे के शारीरिक और मानसिक लक्षणों की सही पहचान करना सीखें।

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परामर्श शुरू करेंयह मार्गदर्शिका बच्चों में पिनवॉर्म (चुन्ने) और अन्य आंतों के परजीवियों के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किए जाने वाले विभिन्न होम्योपैथिक उपचारों की रूपरेखा प्रदान करती है। होम्योपैथी में लक्षणों में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विशेषताएं शामिल होती हैं ताकि रोगी के लिए सही उपचार का चयन किया जा सके।
होम्योपैथी "लक्षणों की समग्रता" (totality of symptoms) के आधार पर काम करती है, यही कारण है कि पिन से डरना, अंतर्वर्धित नाखून, या विशिष्ट व्यवहार जैसी असंबद्ध लगने वाली विशेषताएं पाचन और कृमि-संबंधी लक्षणों के साथ सूचीबद्ध हैं।
यहाँ प्रमुख उपचार और उनके सांकेतिक लक्षण दिए गए हैं:
1. नेट्रम फॉस्फोरिकम (Natrum Phosphoricum - शूसलर की दवा)
यह थ्रेडवर्म या लंबे कीड़ों के लिए एक प्रमुख टिश्यू साल्ट उपचार है, जिसकी विशेषता शरीर में गंभीर एसिडिटी (अम्लता) है।
पाचन लक्षण: खट्टी डकारें, खट्टी उल्टी और हरे रंग का दस्त। भोजन से भरा मुँह थूक देना। आंतों में दर्द, गैस का दर्द (flatulent colic), और जिद्दी कब्ज। मल सफेद या हरा हो सकता है, कभी-कभी पित्त (bile) की कमी के कारण पीलिया के साथ।
कृमि के लक्षण: नाक खुरचना, गुदा (anus) में खुजली (खासकर रात में बिस्तर पर गर्म होने पर)। गुदा में दर्द और छिला हुआ महसूस हो सकता है।
शारीरिक लक्षण: मुँह की छत और जीभ के पिछले हिस्से पर पीली, मलाईदार परत। जीभ की नोक पर छाले। बार-बार भेंगापन और चेहरे की मांसपेशियों का फड़कना। पीली त्वचा, पित्ती (hives), और एरीसिपेलस (erysipelas) (चिकने, लाल, चमकदार त्वचा के चकत्ते)। पैर दिन में बर्फ जैसे ठंडे रहते हैं और रात में जलते हैं। सूजी हुई लिम्फ ग्रंथियां।
मानसिक और नींद के लक्षण: बेचैन नींद। रात में डर कर जागना, यह कल्पना करना कि फर्नीचर के टुकड़े लोग हैं या बगल के कमरे में कदमों की आहट सुनना।
ऑक्सालुरिया (Oxaluria) इस दवा के लिए उल्लिखित एक स्थिति है, जो मूत्र में ऑक्सालेट के अत्यधिक उत्सर्जन को संदर्भित करती है, जो अक्सर उच्च एसिडिटी से जुड़ी होती है।
1x trit का अर्थ "ट्रिट्यूरेशन" है, जिसका अर्थ है कि दवा को एक विशिष्ट कम शक्ति तक दूध की चीनी (milk sugar) के साथ पीसा जाता है।
2. स्पाइजेलिया (Spigelia - वर्म-ग्रास)
यूरोप में ऐतिहासिक रूप से एन्थेलमिंटिक (कृमिनाशक) के रूप में जाना जाने वाला यह उपचार लम्ब्रिसी (lumbrici) (गोलकृमि) और थ्रेडवर्म को बाहर निकालने के लिए जाना जाता है।
लक्षित रोगी प्रोफ़ाइल: यह रूमेटिक डायथेसिस (जोड़ों के दर्द की प्रवृत्ति) वाले एनीमिक, दुर्बल बच्चों, जिनके बाल हल्के रंग के हों, और जो पीले, पतले, फूले हुए या कमजोर दिखते हों तथा जिनकी त्वचा झुर्रीदार, मिट्टी जैसे पीले रंग की हो, के लिए उपयुक्त है।
यह स्क्रोफुलस (scrofulous) बच्चों के लिए भी उपयुक्त है, यह एक पुराना चिकित्सा शब्द है जो सूजी हुई लिम्फ नोड्स की प्रवृत्ति को संदर्भित करता है, जो अक्सर तपेदिक (tuberculosis) से जुड़ा होता है।
पाचन और कृमि के लक्षण: गुदा और नाक में खुजली। नाभि के आसपास दर्द, पेट में ऐंठन और बोर्बोरिग्मस (borborygmus)। बोर्बोरिग्मस आंतों में गड़गड़ाहट की आवाज़ के लिए एक चिकित्सा शब्द है। ऐसा महसूस होना जैसे मलाशय (rectum) और गुदा में कुछ रेंग रहा हो। सड़ी हुई सांस और बदबूदार गैस।
शारीरिक लक्षण: फैली हुई पुतलियाँ, स्ट्राबिस्मस (strabismus) (भेंगापन), झटकेदार हलचल, पीला चेहरा और आँखों के चारों ओर नीले घेरे। गले में सूजन के साथ हल्का लालपन, सूजी हुई श्लेष्मा झिल्ली (mucous membranes), और बार-बार निगलना। धड़कन बढ़ना (Palpitations)।
मानसिक लक्षण: नुकीली चीजों, जैसे पिन से स्पष्ट डर। (दवा Silicea में एक समान लक्षण होता है, लेकिन एक Silicea रोगी डरने के बावजूद सक्रिय रूप से पिन ढूंढता है)।
जुड़ी हुई स्थितियां: हकलाना (पहले शब्दांश को 3 या 4 बार दोहराना) जो पेट और कृमि की बीमारियों से जुड़ा होता है (तुलना करें Sabadilla, Cina, Teucrium, Scirrhus, Stannum से)। हृदय के मामलों में उपयोगी जहां कब्ज एक परेशानी वाली जटिलता है। गर्भावस्था की मतली। सिग्मॉइड या मलाशय के सिरस (कठोर ट्यूमर) से असहनीय दर्द।
3. ट्यूक्रियम मारम वेरुम (Teucrium Marum Verum)
पिनवॉर्म और हेल्मिंथियासिस (helminthiasis) के विशिष्ट लक्षणों के लिए एक उपयोगी दवा। हेल्मिंथियासिस परजीवी कृमि संक्रमण के लिए एक नैदानिक शब्द है।
मुख्य लक्षण: गुदा में तेज जलन और खुजली जो नींद में बाधा डालती है। नाक में रेंगने का एहसास (रोगी को इसे लगातार खुरचना पड़ता है)। अनियमित भूख, बदबूदार सांस, बाधित नींद और सामान्य बेचैनी।
लक्षित रोगी प्रोफ़ाइल: वृद्ध व्यक्तियों और बच्चों के लिए उपयुक्त, विशेष रूप से नाजुक, संवेदनशील और अति-उत्तेजित (over-excitable) व्यक्तियों के लिए। तब उपयोगी होता है जब रोगियों ने बहुत अधिक दवा ली हो, जिससे एक अतिसंवेदनशील स्थिति पैदा हो गई हो जहाँ अन्य उपचार काम नहीं करते। मेहनत करने की अनिच्छा, लेकिन खुली हवा में व्यायाम करने की इच्छा, जिससे वे थकते नहीं हैं। वजन और ताकत का तेजी से कम होना; एनोरेक्सिया (भूख न लगना)।
होम्योपैथिक दर्शन में, कृमि और पॉलीप्स की एक साथ उपस्थिति अक्सर एक अंतर्निहित "ट्यूबरकुलर टेंट (tubercular taint)" या वंशानुगत संवेदनशीलता का संकेत देती है।
श्वसन और नाक के लक्षण: नेजल पॉलीप्स (नाक के मांस का बढ़ना) जिसके कारण रोगी जिस करवट सोता है, उसी तरफ की नाक बंद हो जाती है। सेप्टम के पास दाहिने नथुने के नीचे बड़े लाल मुँहासे (छूने पर दर्दनाक)। सूंघने की क्षमता का खत्म होना (anosmia)। एट्रोफिक कैटरर (Atrophic catarrh)। खांसते या गला साफ करते समय गले में फफूंद (mouldy) जैसा स्वाद। पीछे की नासिका से ठोस गांठों का निकलना। फॉलिक्युलर ग्रसनीशोथ (Follicular pharyngitis)। खांसने से खांसी का बदतर होना।
अन्य लक्षण: आंतरिक झटके (उत्तेजना से बदतर), उत्तेजना के बाद नींद न आना। तालू और कानों में खुजली। अंतर्वर्धित नाखून (Ingrown nails)।
वृद्धिकारक (Aggravations): लक्षण गर्मी, बिस्तर की गर्मी और गीले मौसम से बदतर हो जाते हैं।
4. स्टैनम (Stannum)
परजीवी निष्कासन में इस दवा का एक अत्यधिक विशिष्ट कार्य है।
कार्य: यह कीड़ों को सुन्न कर देता है, उन्हें लकवाग्रस्त या सुस्त बना देता है, ताकि मानक जुलाब (laxatives) आसानी से उन्हें शरीर से एक बार में बाहर निकाल सकें।

5. सीना (Cina)
परजीवियों से पीड़ित अत्यधिक चिड़चिड़े बच्चों के लिए यह सबसे प्रमुख दवा है।
व्यवहार और मानसिक लक्षण: गंभीर मानसिक और शारीरिक अतिसंवेदनशीलता (hyperesthesia)। बच्चा अत्यधिक चिड़चिड़ा होता है: उसे छुआ नहीं जा सकता, देखा नहीं जा सकता, या अजनबियों द्वारा संपर्क नहीं किया जा सकता। वे चीजें चाहते हैं लेकिन यह नहीं जानते कि वे क्या चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें गोद में उठाया जाए, फिर भी वे संभाले जाने से चिढ़ते हैं। कोई भी गड़बड़ी ऐंठन (convulsion) पैदा कर सकती है (इस जोखिम के कारण उन्हें सुरक्षित रूप से दंडित नहीं किया जा सकता)। यदि वे डर जाते हैं या उन्हें डांटा जाता है, तो उनका मस्तिष्क और पेट खराब हो जाता है।
नींद के लक्षण: झटके और फड़कने के साथ बेचैन नींद। सोते समय दांत पीसना और चबाना। बच्चा डर कर उठता है, डरावनी चीजें देखता है और रोता है। सिर को लगातार एक तरफ से दूसरी तरफ घुमाता है।
पाचन और भूख के लक्षण: परिवर्तनशील भूख या "कैनाइन हंगर (canine hunger)" (खाने या उल्टी करने के बाद भी राहत नहीं मिलती; हमेशा खालीपन महसूस होता है)। "कैनाइन हंगर" का तात्पर्य एक प्रचंड, अनियंत्रित भूख से है, जो अक्सर इसलिए होती है क्योंकि कीड़े मेजबान (host) के पोषक तत्वों का सेवन करते हैं। बच्चे की सांसों से "कृमि की गंध" आती है, वह खट्टा दूध थूकता है, खट्टी गैस डकारता है और उससे खट्टी गंध आती है। तरल पदार्थ भोजन नली (esophagus) से गड़गड़ाहट के साथ नीचे जाते हुए सुनाई देते हैं (तुलना करें Arsenicum, Cuprum से)। दूधिया पेशाब।
कृमि के लक्षण: बच्चा आक्रामक रूप से अपने हाथों से, तकिए पर, या नर्स के कंधे पर अपनी नाक रगड़ता है या खुरचता है जब तक कि खून न निकल आए।
शारीरिक लक्षण: आँखों के चारों ओर स्पष्ट घेरे के साथ बीमार, पीला चेहरा। हाथों और पैरों का फड़कना। खोपड़ी की संवेदनशीलता (बालों में कंघी करना बर्दाश्त नहीं कर सकता)। सिलाई जैसे बारीकी वाले काम से सिर और आँखों में दर्द (तुलना करें Ruta से)।
स्थिति (Modality): बच्चा अपने पेट के बल लेटना पसंद करता है (तुलना करें Podophyllum से), और इस स्थिति में उसकी खांसी में सुधार होता है।

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