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एडिमा - Edema (शरीर में पानी की सूजन) को समझना: कारण, लक्षण और होम्योपैथिक इलाज

हाथ, पैर या टखनों की सूजन अक्सर शरीर में अतिरिक्त पानी जमा होने से होती है -- होम्योपैथी सूजन के स्थान और समय का बारीकी से अध्ययन करती है।

एडिमा - Edema (शरीर में पानी की सूजन) को समझना: कारण, लक्षण और होम्योपैथिक इलाज

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हमारा शरीर लाखों सेल्स (cells) से बना है, जो आपस में जुड़कर टिशू (tissues) बनाते हैं। इन सेल्स के अंदर और बाहर फ्लूइड (fluid) या तरल पदार्थ भरा होता है। यही कारण है कि हमारे शरीर के कुल वजन का लगभग 65% हिस्सा पानी होता है।

एडिमा (Edema या Dropsy) का मतलब है शरीर में पानी या फ्लूइड का जमा हो जाना (fluid retention)। जब शरीर के टिशू में बहुत ज़्यादा फ्लूइड (मुख्य रूप से पानी) जमा हो जाता है, तो उस हिस्से में सूजन (swelling) आ जाती है। यह सूजन आमतौर पर हमारे वेनस सिस्टम (नसों) या लिम्फैटिक सिस्टम (lymphatic system - वो नलियां जो इन्फेक्शन से लड़ने वाले फ्लूइड को ले जाती हैं) से जुड़ी होती है।

एडिमा से जुड़े कुछ ज़रूरी और महत्वपूर्ण तथ्य (Highlighted Facts)

  • असर कहाँ होता है: एडिमा का असर सबसे ज़्यादा हाथों, बाँहों, पैरों और एंकल (peripheral edema) पर होता है। लेकिन यह ब्रेन (cerebral edema) और आँखों (macular edema) में भी हो सकता है।

  • फ्लूइड बैलेंस (Fluid Balance): नॉर्मल स्थिति में, शरीर में पानी का बैलेंस इस बात पर निर्भर करता है कि हम कितना फ्लूइड ले रहे हैं (खाने-पीने से) और कितना फ्लूइड बाहर निकाल रहे हैं (यूरिन, मल, पसीना और सांस छोड़ने के ज़रिए)।

  • बाहरी कारण: आस-पास का तापमान (temperature) और भारी कसरत (exercise) भी शरीर में पानी के इनटेक और आउटपुट पर सीधा असर डालते हैं।

  • एडिमा कोई बीमारी नहीं, एक लक्षण (Symptom) है: एडिमा खुद में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर चल रही किसी दूसरी बीमारी का इशारा है। उदाहरण के लिए, यह किडनी डिसीज, हार्ट प्रॉब्लम या लिम्फेडेमा (lymphoedema - जब लिम्फ फ्लूइड टिशू से बाहर नहीं निकल पाता) का संकेत हो सकता है।

  • लाइफस्टाइल का असर: प्रेग्नेंसी या डाइट में बहुत ज़्यादा नमक खाने जैसी लाइफस्टाइल की आदतों से भी शरीर में सूजन आ सकती है।

  • पिटिंग (Pitting) बनाम नॉन-पिटिंग (Non-Pitting): क्लीनिकली एडिमा को दो तरह से देखा जाता है- "पिटिंग" (जहाँ उंगली से दबाने पर त्वचा में गड्ढा बन जाता है) और "नॉन-पिटिंग" (गड्ढा नहीं बनता, यह अक्सर लिम्फैटिक या थायरॉइड प्रॉब्लम से जुड़ा होता है)।

एडिमा (सूजन) के लिए होम्योपैथिक दवाइयां

नीचे ड्रॉप्सिकल कंडीशन (सूजन की स्थिति) के लिए होम्योपैथिक दवाओं की लिस्ट दी गई है, जिन्हें उनके लक्षणों के अनुसार बाँटा गया है:

सूजन (Dropsy) की 3 प्रमुख दवाओं में अंतर

इन तीन मुख्य दवाओं को प्यास और सूजन की जगह के आधार पर आसानी से पहचाना जा सकता है:

लक्षण (Feature)

Apocynum cannabinum

Arsenicum album

Apis mellifica

प्यास (Thirst)

बहुत ज़्यादा प्यास जो बुझती नहीं।

भयंकर प्यास; बार-बार लेकिन थोड़ा-थोड़ा पानी पीता है।

प्यास बिल्कुल नहीं लगती (Thirstless)।

सूजन की जगह

मरीज जिस करवट लेटता है, उस तरफ सूजन आ जाती है।

सूजन मुख्य रूप से हाथ-पैरों (extremities) में होती है।

सूजन मुख्य रूप से आँखों के नीचे होती है।

एडिमा के लिए अन्य होम्योपैथिक दवाओं की डिटेल (Materia Medica)

Aceticum acidum (एसिटिकम एसिडम)

  • लक्षण: यह सूजन में Arsenicum और Apis के बीच की दवा है।

  • खास पहचान: इसमें मरीज को बहुत प्यास लगती है और पेट की दिक्कतें (gastric symptoms) ज़्यादा होती हैं। चेहरा और हाथ-पैर मोम (wax) की तरह सफेद और ट्रांसपेरेंट दिखते हैं।

Apis mellifica (एपिस मेलिफिका)

  • दिखावट: स्किन मोम जैसी, सफेद और लगभग ट्रांसपेरेंट हो जाती है (खासकर ओवरी की सूजन में)।

  • यूरिन: बहुत कम, मिल्की या कॉफी ग्राउंड (coffee grounds) जैसे रंग का यूरिन आता है।

  • दर्द का प्रकार: सबसे खास लक्षण है मधुमक्खी के डंक मारने जैसा (stinging) और जलन वाला दर्द (चेहरे, गले, ओवरी, पाइल्स या ट्यूमर में)। पेट और पसलियों को छूने पर बहुत दर्द होता है।

  • मानसिक लक्षण: मरीज बहुत बेचैन (restless) और हड़बड़ी में रहता है (चीजें तोड़-फोड़ देना)। बच्चे सुन्न अवस्था (torpor) में पड़े रहते हैं, अचानक चीखते हैं, दांत पीसते हैं या सिर को तकिये में धंसाते हैं।

  • खास बात: सूजन के साथ प्यास बिल्कुल नहीं लगती। दाहिनी ओवरी (right ovary) में सूजन के साथ खांसी होती है।

Apocynum cannabinum (एपोसाइनम कैनाबिनम)

  • इस्तेमाल: यह ब्रेन (hydrocephalus) और पेट की सूजन (abdominal dropsy) में एक डाययूरेटिक (यूरिन बढ़ाने वाली दवा) की तरह काम करती है। खासकर तब जब सूजन लिवर की बीमारी की वजह से हो।

  • पेट की दिक्कतें: पीले या ब्राउन रंग का दस्त (diarrhea) जो बहुत प्रेशर के साथ निकलता है। पेट में बहुत कमजोरी और खालीपन महसूस होता है। प्यास बहुत लगती है, लेकिन पानी पीते ही पेट में दिक्कत होने लगती है।

Arsenicum album (आर्सेनिकम एल्बम)

  • इस्तेमाल: यह हर तरह के एडिमा में उपयोगी है, खासकर हार्ट के साइज बढ़ने (hypertrophy) के कारण होने वाली सूजन में।

  • खास लक्षण: स्किन वैक्स जैसी ट्रांसपेरेंट। बुझने न वाली और जलन पैदा करने वाली प्यास (मरीज बार-बार पानी पीता है, लेकिन एक बार में थोड़ा सा ही पीता है, पानी पचता नहीं है)।

  • तकलीफ कब बढ़ती है: आधी रात के बाद (after midnight) तकलीफें बढ़ जाती हैं। दम घुटने जैसा महसूस होता है। तेज चलने या ऊंचाई चढ़ने पर सांस लेने में दिक्कत होती है।

  • मानसिक स्थिति: अकेले रहने और मरने का बहुत डर लगता है; मरीज बहुत बेचैन रहता है और पूरी तरह से टूट चुका होता है (prostration)।

Aurum muriaticum (औरम मूर)

  • लक्षण: जब सूजन यूरिन में प्रोटीन (albuminuria) आने, रुक-रुक कर बुखार आने या लिवर/स्प्लीन की बीमारी के साथ हो।

Bryonia alba के बाद Sulphur (ब्रायोनिया के बाद सल्फर)

  • लक्षण: खासकर प्रेग्नेंसी के दौरान पैरों में होने वाली सूजन के लिए बहुत असरदार।

Cactus grandiflorus (कैक्टस ग्रैंडीफ्लोरस)

  • लक्षण: लेफ्ट साइड (बाएं) हाथ, पैर और एंकल में सूजन।

  • खास अहसास: हार्ट में ऐसा महसूस होता है जैसे किसी लोहे के बैंड (iron band) से उसे कस दिया गया हो, जिससे वह ठीक से धड़क नहीं पा रहा है।

China officinalis / Cinchona (चाइना)

  • लक्षण: शरीर से बहुत ज़्यादा खून या फ्लूइड (fluid) बह जाने के बाद (जैसे- ब्लीडिंग, पसीना आना, दस्त होना) होने वाली कमजोरी (debility) और सूजन।

  • पेट: पेट बहुत फूला हुआ लगता है (जैसे पेट ठसाठस भरा हो), डकार आने से भी कोई आराम नहीं मिलता। फल खाने के बाद बिना पचे हुए खाने के दस्त हो जाते हैं। मल काले और पानी जैसे होते हैं, जिनमें दर्द नहीं होता।

  • अन्य: खून बहने के बाद बहुत तेज़ धड़कने वाला सिरदर्द, कानों में सीटी बजने की आवाज़ (ringing in ears) और कमजोरी।

Digitalis purpurea (डिजिटलिस)

  • इस्तेमाल: हार्ट की बीमारियों या स्कार्लेट फीवर के बाद होने वाली किडनी की सूजन (post-scarlatinal nephritis) में।

  • खास लक्षण: पल्स (pulse) बहुत धीमी या कमज़ोर हो जाती है। अचानक से ऐसा लगता है जैसे हार्ट ने धड़कना बंद कर दिया हो (heart stood still), जिसके साथ बहुत घबराहट होती है।

  • सांस और यूरिन: मरीज बार-बार गहरी सांस लेना चाहता है। यूरिन बहुत कम, डार्क और गर्म आता है। पेनिस और स्क्रोटम में सूजन आ जाती है।

Kali hydroiodicum (काली हाइड्रोआयोडिकम)

  • लक्षण: फेफड़ों (lungs) में सूजन (Bright's disease में) और खांसी जिसमें झागदार (frothy) कफ निकले। टीबी (consumption) जैसी स्थिति।

Lachesis muta (लैकेसिस म्यूटा)

  • दिखावट: सूजन वाली जगह की स्किन डार्क या नीली-काली (bluish-black) हो जाती है। यूरिन डार्क होता है और उसमें एल्बुमिन (albumen) होता है।

  • गला: गले में ऐसा लगता है जैसे सूजन हो या खाली घूंट निगलने पर दो गाँठें आपस में टकरा रही हों, लेकिन खाना निगलने से आराम मिलता है। लेफ्ट साइड के टॉन्सिल में दर्द होता है।

  • खास बात: सो कर उठने के बाद (after sleep) सारी तकलीफें बढ़ जाती हैं। मरीज गले या शरीर के किसी हिस्से पर कपड़े का टच भी बर्दाश्त नहीं कर पाता। मेनोपॉज़ (climacteric period) के दौरान होने वाली हॉट फ्लैश और सूजन। दर्द तब कम होता है जब मेंस्ट्रुअल फ्लो (period blood) शुरू हो जाता है।

Lycopodium clavatum (लाइकोपोडियम)

  • लक्षण: शरीर के निचले हिस्से (lower body) में सूजन (खासकर लिवर डिसीज के कारण)। पैर सूज जाते हैं और उन पर अल्सर हो जाते हैं जिनमें से पानी (serum) रिसता है। शरीर का ऊपरी हिस्सा बहुत दुबला (emaciated) होता है।

  • पेट: बहुत तेज़ भूख लगती है, लेकिन 2-4 निवाले खाने में ही पेट फुल हो जाता है। पेट में बहुत गैस बनती है और गड़गड़ाहट होती है, गैस पास होने (flatus) से आराम मिलता है पर डकार से नहीं।

  • यूरिन: यूरिन पास करने से पहले पीठ में बहुत तेज़ दर्द होता है। यूरिन में लाल रेत जैसा (red sandy sediment) जमाव दिखता है।

  • तकलीफ कब बढ़ती है: सबसे खास लक्षण है शाम 4 बजे से रात 8 बजे के बीच तकलीफ का बढ़ना। एक पैर गर्म और दूसरा ठंडा रहता है।

Phosphorus (फॉस्फोरस)

  • लक्षण: मरीज पीला और एनीमिक (anemic) दिखता है। चेहरा सूजा हुआ होता है, खासकर आँखों के चारो तरफ सूजन होती है

  • पेट: पेट में ठंडा पानी जाते ही, जैसे ही वह अंदर जाकर गर्म होता है, उल्टी के ज़रिए बाहर आ जाता है (thrown up)।

  • खांसी और नींद: मरीज सिर्फ राइट साइड (दाहिनी करवट) ही लेट पाता है। शाम के समय सूखी खांसी जो ठंडी हवा में जाने पर बढ़ जाती है। खांसते समय पूरा शरीर कांपने लगता है।

  • खास बात: छोटे से घाव से भी बहुत ज़्यादा खून बहता है। आंधी-तूफान (thunder storm) के दौरान तकलीफें बढ़ जाती हैं।

Rhus toxicodendron (रस्टॉक्स)

  • लक्षण: पेनिस, वल्वा (vulva - फीमेल ऑर्गन) और मुंह के आस-पास होने वाली एडिमा / सूजन के लिए।

Scilla maritima (स्क्विल्ला)

  • लक्षण: अचानक से आने वाली बहुत ज़्यादा सूजन (Acute dropsical swellings) जिसमें यूरिन का आना पूरी तरह रुक जाता है (suppression of urine)।

Terebinthina (टेरीबिन्थ)

  • लक्षण: किडनी में कंजेशन की वजह से होने वाली सूजन। किडनी की जगह पर भयंकर जलन और खिंचाव वाला दर्द होता है।

  • यूरिन: बहुत तकलीफ के साथ पेशाब आता है (strangury)। यूरिन बहुत कम और खून मिला हुआ (bloody) होता है।

Thyroidinum (थायरॉइडिनम)

  • लक्षण: जब चेहरे और हाथ-पैरों पर बिना किसी साफ कारण के (without apparent cause) सूजन आ जाए।

Vesicaria communis (वेसिकेरिया)

  • लक्षण: जब किडनी काम करना पूरी तरह बंद कर दे (complete kidney failure) और यूरिन बनना ही रुक जाए, तब यह दवा असरदार होती है। यह Polycystic kidney disease (PKD - किडनी में सिस्ट बन जाना) में भी इस्तेमाल होती है।

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