Nitric Acid (Nitricum Acidum) Homeopathy Medicine: उपयोग, मुख्य लक्षण और फायदे
जानिए होम्योपैथी की असरदार दवा Nitric Acid के उपयोग और बेमिसाल फायदे। यह त्वचा की दरारों (fissures), ब्लीडिंग मस्सों (warts), पेट की समस्याओं और क्रॉनिक बीमारियों के लिए कैसे काम करती है, पढ़ें पूरी जानकारी आसान भाषा में।

गंभीर स्थिति का स्वयं उपचार न करें
इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
परामर्श शुरू करेंनाइट्रिक एसिड (Nitricum acidum) होम्योपैथी की एक बहुत गहरी और असरदार दवा है, जो विशेष शारीरिक संरचना (constitution) और क्रॉनिक बीमारियों के लिए इस्तेमाल होती है। यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनका रंग सांवला (brown complexion) होता है।
होम्योपैथी में, यह दवा हड्डियों की गंभीर बीमारियों को ठीक करने में बहुत सफल मानी जाती है, खासकर तब जब ये बीमारियां सिफलिस (syphilis) या पारे (mercury) के बहुत ज्यादा इस्तेमाल के बाद हुई हों।
✨ नाइट्रिक एसिड मुख्य रूप से शरीर के उन हिस्सों पर असर करती है जहां त्वचा और श्लेष्म झिल्ली (mucous membranes) मिलते हैं, जैसे होंठों के किनारे, नथुने और मलद्वार (anus), जहां गहरे कट या दरारें (fissures) बन जाती हैं।
मानसिक और भावनात्मक स्थिति (Mental and Emotional Disposition)
नाइट्रिक एसिड के मरीजों का मन शांत नहीं रहता। वे गहरी उदासी और हमेशा चिड़चिड़ेपन (chagrined temper) से परेशान रहते हैं। उनमें बहुत ज्यादा गुस्सा होता है और अपनी बीमारी के अंत को लेकर एक अजीब सी बेचैनी होती है, जो अक्सर मौत के डर (fear of death) में बदल जाती है। इसके अलावा, उन्हें काम करने से बहुत चिढ़ (aversion for employment) होती है।
✨ नाइट्रिक एसिड के मरीज का गुस्सा अक्सर नफरत और बदला लेने वाले स्वभाव में बदल जाता है; वे बहुत जल्दी बुरा मान जाते हैं, पुरानी बातों को मन में दबाए रखते हैं और माफ़ी मांगने पर भी आसानी से शांत नहीं होते।
सिर और इंद्रियां (Head and Sensory Organs)
सिर: मरीजों को अक्सर धड़कने वाला सिरदर्द (pulsating headache) होता है और चक्कर (vertigo) इतने तेज आते हैं कि उन्हें गिरने से बचने के लिए बैठना पड़ता है।
आंखें: यह दवा एमोरोसिस (amaurosis - आंखों की रोशनी का आंशिक या पूरी तरह से कम होना) में बहुत काम आती है। यह ऊपरी पलक के लकवे (paralysis), आंखों में भारीपन महसूस होने और आंखों से मवाद (pus) बहने की समस्या को ठीक करती है।
✨ शरीर में, खासकर आंखों और अन्य अंगों में, मरीज को ऐसा दर्द महसूस होता है जैसे कोई नुकीली चीज़, कांच का टुकड़ा या लकड़ी चुभ रही हो।
कान: कानों में भिनभिनाहट (buzzing) और धड़कन महसूस होना, कानों में रुकावट लगना और ऊंचा सुनाई देना (hard-hearing) इसके लक्षण हैं।
नाक और चेहरा: नाक में सूखापन और नकसीर (bleeding of the nose) की समस्या होती है। चेहरे पर बटन जैसे दाने (button-like eruption) और होंठों के लाल हिस्से में अल्सर (ulceration) हो सकते हैं। गर्दन की ग्रंथियों (glands) में सूजन होना भी इसका एक खास लक्षण है।
पाचन तंत्र और पोषण (Digestive System and Nutrition)
पेट की आदतों पर ध्यान दें तो इन मरीजों का मल (stool) हमेशा बहुत नरम होता है। इस वजह से, नाइट्रिक एसिड उन मरीजों को शायद ही कभी दी जाती है जिन्हें कब्ज (constipation) की शिकायत रहती है।
गले में जलन और छिलने जैसा दर्द (pain as of excoriation) महसूस होता है। एक अजीब लक्षण यह है कि जल्दी पानी पीने पर गला अचानक बंद सा (closure of the throat) हो जाता है। मुंह का स्वाद कड़वा रहता है। मरीजों को मांस (animal food) खाने से नफरत होती है और वे दूध बिल्कुल नहीं पचा पाते (impossibility of digesting milk)। फेफड़ों में मवाद (suppuration of the lungs) होने पर बहुत ज्यादा प्यास लगती है। मरीजों को अक्सर न पचने वाली चीजें जैसे मिट्टी, चॉक या कागज खाने की तीव्र इच्छा होती है, साथ ही वे फैट और नमकीन खाना बहुत पसंद करते हैं।
पेट (Abdomen): पेट में गैस (accumulation of air) बनती है, जो सुबह और रात में निकलती है। पेट में ऐंठन (colics) होती है और छूने पर तेज चुभने वाला दर्द (shootings) होता है। पेट के निचले हिस्से में अल्सर जैसा दर्द होता है, पेट में गड़गड़ाहट (borborygmi) होती है और मलद्वार (fundament) में भारीपन महसूस होता है। मल नरम होने के बावजूद भी, शौच के समय मलद्वार में बहुत तेज, चीरने वाला और चुभने वाला दर्द होता है, जो शौच के बाद भी घंटों तक बना रहता है।
मूत्र, प्रजनन और श्वसन तंत्र (Urinary, Reproductive, and Respiratory)
मूत्र संबंधी लक्षण बहुत स्पष्ट होते हैं - पेशाब से बहुत तेज बदबू (fetidness) आती है और पेशाब करते समय दर्द होता है। इसके साथ ही अक्सर कमर के निचले हिस्से (groin) की ग्रंथियों में सूजन आ जाती है। होम्योपैथी की किताबों में बताया गया है कि इसके बहुत ज्यादा बदबूदार पेशाब की महक घोड़े के पेशाब जैसी होती है।
प्रजनन और श्वसन तंत्र में, यह दवा ल्यूकोरिया (leucorrhoea), अस्थमा (asthma), सूखी सर्दी (dry coryza) और नथुनों में रुकावट (obstruction in the nostrils) के लिए इस्तेमाल की जाती है।
पीठ और हाथ-पैर (Back and Extremities)
मांसपेशियों और हड्डियों (Musculoskeletal system) पर इसका काफी असर होता है। लक्षणों में शामिल हैं:
सेक्रम (sacrum) और पीठ में दर्द।
गर्दन के पिछले हिस्से में अकड़न (stiffness) और कंधों में तेज चुभन वाला दर्द।
कुर्सी से उठते समय जांघों में दर्द और घुटनों में कमजोरी (feebleness)।
बैठकर उठने के बाद चलने पर पैरों की पिंडलियों (calfs) में ऐंठन और चलते समय एड़ी (heel) में चुभने वाला दर्द।
पैरों का ठंडा रहना और बर्फीली ठंडक (icy coldness) महसूस होना।
हाथ-पैरों में चीरने वाला दर्द और जरा सी भी ठंड लगने पर अंगों में खुजली वाली सूजन आ जाना।
मरीज को बहुत ज्यादा ठंड लगती है; मौसम में बदलाव और नम, ठंडे मौसम से सारे शारीरिक लक्षण और जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है।
त्वचा, नींद और शरीर के अन्य लक्षण (Skin, Sleep, and Systemic Symptoms)
त्वचा पर दाद (tetters - विभिन्न प्रकार की खुजली या छाले वाली त्वचा की बीमारियां) की खुजली, लाल-भूरे रंग के धब्बे और मस्से (warts) हो सकते हैं। नाइट्रिक एसिड के मस्से आमतौर पर बड़े, कटे-फटे या डंठल वाले (pedunculated) होते हैं, और धोने या छूने पर उनमें से बहुत आसानी से खून निकलने लगता है।
शरीर में आसानी से ठंड लगने की प्रवृत्ति (disposition to take cold) होती है। ऊर्जा का स्तर बदलता रहता है, सुबह के समय थकान (morning lassitude) और खाना खाने के बाद कमजोरी महसूस होती है। रात में बेचैनी (agitation) और बार-बार आने वाले सपनों से नींद खराब होती है। इसके अलावा, मरीजों को दोपहर में बुखार (afternoon fever) आ सकता है, जिसमें बारी-बारी से सर्दी और गर्मी लगती है, और रात में बहुत पसीना (night-sweat) आता है।
गंभीर स्थिति का स्वयं उपचार न करें
इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
परामर्श शुरू करें