रोज़मर्रा की चोटों के लिए होम्योपैथिक औषधियाँ
चोट, घाव, मोच और ऑपरेशन के बाद के दर्द के लिए महत्वपूर्ण होम्योपैथिक दवाइयों की जानकारी। जानिए अर्निका, हाइपरिकम, लेडम और रस टॉक्स के उपयोग।

चोट के प्रकार के अनुसार दवाएँ
अर्निका (Arnica)
लक्षण: चोट लगने के बाद नीला पड़ जाना (Black-and-blue), दर्दनाक दिखना और महसूस होना; मांसपेशियों के ऊतकों में दर्द।
नोट: इसका उपयोग खुले घावों पर नहीं किया जाना चाहिए, इससे इरीसिपेलस (erysipelas) हो सकता है। यह मुख्य रूप से मांसपेशियों के ऊतकों पर काम करती है।
कैल्केरिया कार्ब (Calcarea carb)
लक्षण: रस टॉक्स (Rhus) के बाद बनी रहने वाली कमजोरी, अत्यधिक वजन उठाना (Over-lifting), और खिंचाव (Strains) के लिए।
रोगी का स्वरूप: पसीने से तर, नीली आँखों वाला, मोटा या दुबला लेकिन हमेशा ढीला-ढाला (flabby); जिसके घाव बड़े निशान छोड़ते हैं; जिसकी गर्दन पर कहीं उभार होता है; और जोड़ ढीले होते हैं। कैल्केरिया का रोगी वह है जिसके कैरोटिड त्रिकोण (carotid triangles) में लंबा निशान हो और टेढ़े-मेढ़े पैर हों। मवाद पतला होता है और आमतौर पर आसानी से बहता है।
कैलेंडुला ऑफिसिनालिस (Calendula Officinalis)
लक्षण: घावों और खुली चोटों के लिए एक बेहतरीन दवा।
इस्तेमाल का तरीका: बाहरी रूप से एक्वियस कैलेंडुला (Aqueous Calendula) लगाएं; आंतरिक रूप से क्यू-तीसरी पोटेंसी (Q-3rd potency) में दें।
हाइपरिकम पर्फोरेटम (Hypericum Perforatum - सेंट जॉन वॉर्ट)
लक्षण: यह नसों की 'अर्निका' है। रीढ़ की हड्डी में चोट (Concussion), नसों की चोटें (कुचली हुई उँगली या पैर की उँगलियाँ), और बवासीर में उपयोगी। शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) के बाद जब घाव अत्यधिक संवेदनशील हों। ऐसे अंगों का फटना जिनमें छोटी नसें भरी हों।
विशिष्ट स्थितियाँ: उँगलियों या पैर की उँगलियों के सिरे कुचले या फटे हों, या नाखून उखड़ गया हो। रीढ़ की हड्डी की चोटें। टेलबोन (coccyx) की चोटें, जैसे पीछे की ओर गिरकर किसी पत्थर से टकराना, या प्रसव (labor) के दौरान महिलाओं को लगने वाली चोट। सीढ़ियों से नीचे जाते समय पीछे की ओर गिरना और पीठ का किसी सीढ़ी से टकराकर तुरंत तेज चोट लगना।
कॉकसिडिनिया (Coccydynia): बहुत दर्दनाक, संवेदनशील अंग; जैसे ओसीपুট (occiput), कॉक्सिक्स (coccyx) आदि।
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Buy Nowलेडम (Ledum)
लक्षण: चुभने वाले घाव (Punctured wounds/injuries) और जानवरों के काटने पर।
क्रिया: चुभने वाले घाव (चूहे का काटना, बिल्ली का काटना, मधुमक्खी/बिच्छू का डंक आदि) को सुरक्षित बनाता है; यह चुभने वाले दर्द को रोकता है। इसे तुरंत दें। यदि घाव में सुस्त या सुस्त-दर्द (dull aching) हो तो लेडम दें, यदि दर्द घाव से शुरू होकर बाथ की नसों में ऊपर की तरफ शूट (shoot) करे तो हाइपरिकम दें।
रस टॉक्स (Rhus - पॉइजन आइवी)
लक्षण: संधिशोथ (Rheumatic) या पक्षाघात से जुड़े प्रभाव, अत्यधिक वजन उठाना, मांसपेशियों और नसों (tendons) में खिंचाव, मोच, और भीगने के बुरे प्रभाव।
लक्षण: हर तूफान में आने वाले गठिया के दर्द (जो अक्सर लगातार चलने पर कम हो जाते हैं)। दर्द और अकड़न हिलने-डुलने की शुरुआत में बदतर होती है, लेकिन लगातार चलने और गर्माहट से राहत मिलती है; मरीज ठंडी हवा बर्दाश्त नहीं कर सकता। यह मांसपेशियों की तुलना में लिगामेंट्स (ligaments) पर अधिक असर करती है। इसमें मवाद बनना, तेज दर्द, गहरे लाल रंग की सूजन, सामान्य सुस्ती और सेप्टिसीमिया हो सकता है।
संबंध: ब्रायोनिया (Bryonia) रस टॉक्स की पूरक है; एपिस (Apis) इसकी विरोधी (inimical) है। जोड़ों के खिसकने (dislocations) के प्रबंधन में यह हमारी सबसे अच्छी दवा है।
रूट्टा (Ruta)
लक्षण: उपास्थि (cartilages) और जोड़ों के आसपास की चोटें (Bruises)।
स्टैफिसएग्रिया (Staphysagria)
लक्षण: साफ कटे हुए घाव (तेज धार हथियार से लगे घाव)। स्ट्रेचिंग (तनाव) का एंटीडोट। जब मूत्राशय की पथरी के लिए मूत्रमार्ग (urethra) में अत्यधिक खिंचाव किया गया हो और रोगी अत्यधिक परेशानी में हो, चिल्ला रहा हो, रो रहा हो, ठंडे पसीने से नहला हुआ हो, सिर गर्म हो और शरीर ठंडे पसीने में हो।
ऑपरेशन के लिए स्फिंक्टर (sphincters) को खींचने या अंगों को फाड़ने से होने वाली ठंडक, सिर में कंजेशन, और फाड़ने वाले या चीरने वाले दर्द में उपयोगी। पेट के गंभीर ऑपरेशनों के बाद होने वाले दर्द को नियंत्रित करने के लिए स्टैफिसएग्रिया विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
स्ट्रॉन्शियम कार्ब (Strontium carb)
लक्षण: शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) के बाद अत्यधिक सुस्ती, ठंडक, खून का रिसाव और ठंडी सांसें।
विशिष्ट लक्षणों और पोस्ट-ऑपरेटिव स्थितियों के लिए दवाएँ
सदमा (Shock) और ठंडक
कपूर (Camphor): मुख्य विशेषता ठंडक है।
कार्बो-वेज (Carbo-veg): नीला पड़ जाना (blueness) इसका मुख्य संकेत है।
वैट्रम-एल्बम (Veratrum-alb): माथे और शरीर पर प्रसिद्ध ठंडा पसीना आना इसका संकेत है।
रक्तस्राव (Haemorrhage) के प्रभाव
एकोनाइट (Aconite): बेचैनी और इधर-उधर तड़पने से पहचानी जाती है (यदि यह मानसिक स्थिति न हो तो यह कारगर नहीं है)।
आर्सेनिक (Arsenic): खून बहने के तुरंत बाद लगने वाली बेहिसाब प्यास को शानदार तरीके से नियंत्रित करती है।
चाइना (China): जब तीव्र लक्षण शांत हो चुके हों, तब यह अमूल्य है।
घावों या स्टंप (Stump) में दर्द नियंत्रण
कॉफिया (Coffea): घाव या स्टंप में असहनीय, चीरने वाला दर्द।
एकोनाइट (Aconite): अत्यधिक बेचैनी के साथ मध्यम दर्द।
लेडम (Ledum): चीरे (incision) की रेखा के साथ तेज, चुभने वाला दर्द।
घाव की विशेषताएँ और मवाद के रूप (सिलिसिया बनाम हेपार)
सिलिसिया (Silicea): रोगी वस्तुतः और मानसिक रूप से ठंडा होता है; उसकी हरकतें सुस्त होती हैं; घाव बहुत देर से बनते और भरते हैं; मवाद बदबूदार होता है।
हेपार (Hepar): संक्रमण जल्दी होता है, घाव जल्दी भरने की प्रवृत्ति रखता है, घाव अधिक सक्रिय होता है, और स्राव कम बदबूदार होता है।
फॉस्फोरस (Phosphorus): घाव संवेदनशील होता है; खुलकर खून बहता है; घाव भड़का हुआ और fiery red, या पीला दिखता है, लेकिन हमेशा खून बहने को तैयार रहता है। रोगी लंबा, दुबला-पतला, लाल बालों वाला और चेचक के दाग/झाइयों वाला होता है। उसे कब्ज रहती है और कभी-कभी मूत्राशय की कुछ अनिश्चित समस्या होती है।
लैचेसिस (Lachesis): नीला घाव; बड़ी नसें; संभवतः स्लोघ (slough); घाव में बहुत सारा मृत ऊतक (dead tissue); सुबह के समय स्थिति बदतर; साइनस बनने की प्रवृत्ति। मवाद गाढ़ा और पपड़ीदार (flaky) होता है।
एटिओलॉजी (कारण) और बीमारी के दमन (Suppression) पर विचार
बीमारियों का दमन: त्वचा के रोगों का दबना, फुसफुस और अल्सर का सूखना, तथा कई तथाकथित स्थानीय रोगों के वास्तविक स्वरूप को नजरअंदाज करना और उनका दमन करना आज कई रहस्यों का कारण है। कैंसर के रोगियों के पिछले इतिहास की सावधानीपूर्वक जाँच करने पर दमन (suppression) के प्रमाण मिलते हैं। जिन लोगों ने इस पर विचार नहीं किया है, वे यह जानकर हैरान होंगे कि स्तन कैंसर के कितने प्रतिशत मामले गर्भाशय के स्राव के दमन के बाद सामने आते हैं। संभवतः ये सभी संयोग हो सकते हैं, लेकिन संयोगों की लगभग सार्वभौमिकता किसी अंतर्निहित नियम की ओर इशारा करती है।
चिकित्सक का कर्तव्य: ये अवलोकन इस उम्मीद के साथ दिए गए हैं कि वे कैंसर के लिए एक तर्कसंगत उपचार (rational treatment) के विकास में थोड़ी मदद कर सकें। कोई भी ऐसा उपचार जो अपने पीछे तबाही छोड़े, उसे तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता। सच्ची पद्धति उस चीज़ की रोकथाम में निहित होगी जिसके बारे में हजारों मामले सिखाते हैं कि हम इसे ठीक नहीं कर सकते। रोकथाम चिकित्सक के सर्वोच्च कर्तव्यों में से एक है। कैंसर के मामले में हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
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