सरसापारिला (Sarsaparilla): गुर्दे की पथरी और त्वचा रोगों के लिए होम्योपैथी का अचूक इलाज
होम्योपैथी में सरसापारिला के चमत्कारी फायदों के बारे में विस्तार से जानें। गुर्दे की पथरी के भयानक दर्द से लेकर मूत्र और त्वचा की समस्याओं तक, यह दवा आपके स्वास्थ्य को कैसे सुधार सकती है, यहाँ पढ़ें।

गंभीर स्थिति का स्वयं उपचार न करें
इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
परामर्श शुरू करेंसामान्य और शारीरिक प्रोफ़ाइल (General & Constitutional Profile)
प्रकृतियां (Constitutions): साइकोटिक, सोरिक (स्क्रोफुलस), और सिफलिटिक प्रकृतियों के अनुकूल है।
मारक गुण (Antidotal Properties): पारे (Mercury) के अधिक सेवन या दुरुपयोग के बुरे प्रभावों के लिए एक "पुनर्स्थापक" (restorative) और होम्योपैथिक मारक (antidote) के रूप में कार्य करता है।
शारीरिक स्थिति (Physical State): बहुत अधिक दुबलापन (सूखा रोग); त्वचा सिकुड़ जाती है या परतों (झुर्रियों) में लटकने लगती है।
वनस्पति मूल (Botanical Origin): सरसापारिला स्माइलैक्स (Smilax) पौधे की प्रजातियों, सबसे आम तौर पर स्माइलैक्स रेगेली (Smilax regelii) की सूखी जड़ों से प्राप्त होता है।
मन और स्वभाव (Mind & Disposition)
परिवर्तनशील स्वभाव।
चिड़चिड़ा और उदास, लेकिन फिर भी काम करने की इच्छा बनी रहती है।
मानसिक अवसाद (विशेष रूप से शारीरिक दर्द के कारण)।
सिर और इंद्रियां (Head & Senses)
सिर (Head):
चक्कर आना, विशेष रूप से किसी वस्तु को लंबे समय तक देखने पर, या मतली और खट्टी उल्टी के साथ।
मतली और खट्टी उल्टी के साथ सिरदर्द; सिर में चुभन, दबाव या धड़कन (टीस) जैसा महसूस होना।
बात करते समय सिर में ऐसी आवाज आना जैसे घंटी बज रही हो।
सिर की त्वचा (scalp) की संवेदनशीलता; बालों का झड़ना।
आंखें (Eyes):
आंखों में चुभन। दिन की रोशनी से आंखों में दर्द होना।
आंखों के भीतरी कोने नीले रंग के और सूजे हुए होते हैं।
शाम के समय सफेद कागज लाल दिखाई देता है।
दृष्टि का ऐसे धुंधला होना जैसे कोहरे में देख रहे हों।
कान और नाक (Ears & Nose):
कान के निचले हिस्से (lobe) पर जलन और खुजली वाली पपड़ी (scab)।
नाक के ऊपर और नीचे पपड़ीदार दाने।
चेहरा (Face):
चेहरे पर मिल्क-क्रस्ट (दूध की पपड़ी) जैसे दाने।
माथे पर खुजली और जलन वाले दाने, जो खरोंचने पर नम (गीले) हो जाते हैं।
जबड़े की मांसपेशियों और जोड़ों में अकड़न और खिंचाव।
ऊपरी होंठ पर हर्पीज (दाद)।
मुंह और गला (Mouth & Throat)
दांत (Teeth): ऊपर के सामने वाले दांत संवेदनशील होते हैं। ठंडी हवा और ठंडे पेय पदार्थों से फाड़ने जैसा दर्द।
मुंह (Mouth): जीभ और तालु पर छाले (Aphthae/ulcers)।
गला (Throat): सुबह के समय सूखापन और खुरदरापन। सांस फूलने के साथ गले में ऐंठनयुक्त संकुचन।
पाचन तंत्र और पेट (Digestive System & Abdomen)
भूख (Appetite): भूख की कमी; भोजन के विचार मात्र से ही घृणा होती है।
आमाशय (Stomach):
खाने के दौरान और बाद में कड़वी डकारें आना।
पेट में जलन, विशेषकर ब्रेड (रोटी) खाने के बाद।
खाने के बाद, पेट में कोई संवेदनशीलता नहीं रहती; ऐसा लगता है जैसे कुछ खाया ही न हो।
पेट/उदर (Abdomen): खालीपन, गड़गड़ाहट, जलन या ठंडक का अहसास।
मल (Stool): रुका हुआ, कठोर और अपर्याप्त। बेहोशी के दौरों के साथ कठिन और दर्दनाक मलत्याग।
मूत्र और जनन अंग (प्राथमिक ध्यान) (Urinary & Genital Organs - Primary Focus)
पेशाब और मूत्राशय (Urination & Bladder):
मूत्र का स्राव कम होना, या बिना किसी संवेदना के मूत्रमार्ग से बार-बार और अधिक मात्रा में पीला मूत्र निकलना।
बार-बार, अप्रभावी पेशाब की इच्छा।
सफेद, तीक्ष्ण मवाद और बलगम के स्राव के साथ मूत्राशय में दर्दनाक संकुचन और ऐंठन।
हर बार पेशाब करते समय मूत्रमार्ग में जलन। पेशाब के अंत में रक्त का आना।
मूत्र तेज लाल, गंदला और लंबे कणों (flakes) वाला होता है।
मूत्राशय/मूत्र में पथरी और पीली रेत आना। शिशु पेशाब करने से पहले और उस दौरान रोते हैं, बहुत मात्रा में रेत (sand) निकलती है।
पेशाब के ठीक अंत में होने वाला तीव्र, असहनीय दर्द होम्योपैथी में इस दवा का सबसे प्रसिद्ध मार्गदर्शक (guiding) लक्षण है।
गुर्दे का दर्द (Renal Colic): सरसापारिला गुर्दे की पथरी के गंभीर दर्द के लिए एक प्राथमिक दवा है, विशेष रूप से जब यह दाहिनी ओर हो।
पुरुष (Male): जननांगों पर असहनीय दुर्गंध। लिंगाग्रचर्म (prepuce) पर दाद। रात में दर्दनाक वीर्यपात। पारे द्वारा दबाए गए गोनोरिया (सूजाक) के बुरे प्रभाव।
महिला (Female): मासिक धर्म बहुत देरी से, कम और तीखा (acrid) होता है। मासिक धर्म के दौरान, पेशाब करने की तीव्र इच्छा होती है और जांघों के अंदरूनी हिस्से में दर्द/छिलने जैसा अहसास होता है।
श्वसन तंत्र (Respiratory System)
सांस लेने में बहुत अधिक कठिनाई (ऐंठन जैसी सांस की तकलीफ), जिससे व्यक्ति सांस लेने के लिए अपने गले के कपड़े और कोट/बनियान को ढीला करने के लिए मजबूर हो जाता है।
हाथ-पैर और जोड़ (Extremities - Musculoskeletal)
पीठ (Back): जरा सी हलचल से पीठ में चुभन (टीस)।
ऊपरी अंग (Upper Limbs): बाहों, हाथों और उंगलियों के जोड़ों में चुभन (मुख्य रूप से हिलने-डुलने पर)। उंगलियों पर गहरी, जलन वाली दरारें। उंगलियों के पोरों (tips) में चोट लगने जैसा दर्द और संवेदनशीलता। कांपते हुए हाथ।
निचले अंग (Lower Limbs): पैरों में चुभन (विशेषकर हिलने-डुलने पर)। जांघों और घुटनों में कमजोरी। पिंडलियों पर लाल धब्बे। पैरों में बर्फ जैसी ठंडक और कंपन।
सामान्य अंग (General Limbs): अंग ऐसे स्थिर हो जाते हैं, मानो लकवा मार गया हो। ठंडे पानी में नहाने/भीगने के बाद, या कम मूत्र स्राव के साथ दबे हुए गोनोरिया के कारण गठिया (Arthritic) का दर्द।
त्वचा (Skin)
त्वचा सिकुड़ जाती है या परतों में लटकने लगती है।
सूखे, लाल दाने जिनमें केवल गर्मी लगने पर ही खुजली होती है।
गर्म कमरे से ठंडी हवा में जाते ही शरीर पर चकत्ते (Rash) निकल आते हैं।
पित्ती (Urticaria), दाद (herpes), मस्से, और गहरी, जलने वाली दरारें (rhagades)।
पारे (mercury) के दुरुपयोग के बाद होने वाले अल्सर (घाव)।
नींद, बुखार और स्थितियां (Sleep, Fever & Modalities)
नींद (Sleep): रात में अनिद्रा; बार-बार नींद खुलना।
बुखार और ठंड (Fever & Chills):
शाम के समय नाड़ी (pulse) का तेज होना।
दिन-रात ठंड का असर अधिक रहता है। बार-बार कपकपी (ज्यादातर दोपहर से पहले) जो पैरों से ऊपर की ओर चलती है।
शाम के समय गर्मी, गर्मी की लहरों (flushes) और दिल की धड़कन तेज होने के साथ। शाम की गर्मी के दौरान पसीना आता है, लेकिन केवल माथे पर।
स्थितियां (Modalities): ठंड के दौरान संवेदनाएं और लक्षण बदतर हो जाते हैं। मरीज के गर्म होते ही सुधार (amelioration) होता है।
नैदानिक संकेत (Clinical Indications) सरसापारिला निम्नलिखित स्थितियों के इलाज में उपयोगी है: अस्थमा, मूत्राशय के रोग, हड्डियों के रोग, स्तन के रोग (कठोर गांठ/scirrhus), ब्राइट्स रोग (Bright's disease - किडनी की बीमारी), पथरी (Calculi), रजोनिवृत्ति का समय (Climaxis), कब्ज, कष्टार्तव (Dysmenia), अपच (Dyspepsia), मूत्रकृच्छ (Dysuria - दर्दनाक पेशाब), बिस्तर गीला करना (Enuresis), त्वचा के दाने, आंखों के रोग, बेहोशी, ग्रंथियों का बढ़ना, गोनोरिया (सूजाक), गठिया (Gout), गुर्दे की बजरी (Gravel), फटे हुए हाथ, सिरदर्द, हर्निया, दाद (लिंगाग्रचर्म का), हिचकी, रुक-रुक कर आने वाला बुखार (Intermittents), सूखा रोग (Marasmus), हस्तमैथुन के दुष्प्रभाव, उदासी/अवसाद (Melancholia), पारे का दुरुपयोग, फंगल संक्रमण (Mycosis), धंसे हुए निपल्स, बालों का उलझना (Plica polonica), गुर्दे का दर्द (Renal Colic), त्वचा में दरारें (Rhagades), गोनोरियल गठिया, सेबोरिया, स्पर्मेटिक कॉर्ड की सूजन, स्वप्नदोष/धातु रोग (Spermatorrhea), पेशाब का बूंद-बूंद आना (Strangury), सिफलिस (उपदंश), अल्सर (घाव), और मस्से (Warts)।
गंभीर स्थिति का स्वयं उपचार न करें
इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
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