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PCOD (PCOS) क्या है? लक्षण, इनफर्टिलिटी का सच और असरदार होम्योपैथिक इलाज

क्या आप इर्रेगुलर पीरियड्स, बढ़ते वजन और अनचाहे बालों से परेशान हैं? PCOD और PCOS के असल कारण, सही डाइट और हॉर्मोन्स को नेचुरली बैलेंस करने वाली बेस्ट होम्योपैथिक दवाइयों के बारे में विस्तार से जानें।

PCOD (PCOS) क्या है? लक्षण, इनफर्टिलिटी का सच और असरदार होम्योपैथिक इलाज

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पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज (Polycystic Ovarian Disease - PCOD), जिसे Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) या Stein-Leventhal सिंड्रोम भी कहा जाता है, रिप्रोडक्टिव एज (प्रजनन आयु) की महिलाओं में होने वाला सबसे आम एंडोक्राइन (endocrine) और हार्मोनल डिसऑर्डर है। यह दुनिया भर में हर रेस और नेशनलिटी की महिलाओं में मेंस्ट्रुअल डिस्फंक्शन (पीरियड्स की गड़बड़ी) और इनफर्टिलिटी (बांझपन) का एक प्रमुख कारण है।

मामूली लक्षण (Minor symptoms), जैसे इर्रेगुलर पीरियड्स के साथ वजन बढ़ना और चेहरे या बॉडी पर अनचाहे बाल आना, इन्हें कभी भी नज़रअंदाज़ (neglect) नहीं करना चाहिए। इसका जल्दी ट्रीटमेंट—आइडियली शादी या फैमिली प्लानिंग से पहले—बहुत ज़रूरी है ताकि बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

PCOD को समझें (Understanding PCOD)

नॉर्मली, एक महिला की ओवरीज़ (अंडाशय) में एग्स (ova) बनते हैं, जो फॉलिकल्स (follicles) नाम की छोटी थैलियों के अंदर डेवलप होते हैं। हर महीने मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान, कई फॉलिकल्स डेवलप होते हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ एक पूरी तरह मैच्योर होता है और यूट्रस (बच्चेदानी) में एग रिलीज़ करता है। ओवरीज़ फीमेल हॉर्मोन्स (जैसे एस्ट्रोजन) और थोड़ी मात्रा में मेल हॉर्मोन्स (androgens, जैसे टेस्टोस्टेरोन) भी बनाती हैं।

PCOD में, हार्मोनल इम्बैलेंस की वजह से ये मैच्योर एग्स बाहर नहीं निकल पाते। इसकी जगह, ओवरी इमैच्योर फॉलिकल्स से भर जाती है (जिन्हें अक्सर गलती से "सिस्ट्स" कह दिया जाता है)। ये सिस्ट्स हार्मोनल इम्बैलेंस को और बढ़ाते हैं, जिससे एक विशियस साइकिल (कभी न खत्म होने वाला चक्र) शुरू हो जाता है, ओवरी का साइज़ बढ़ जाता है और मेल/फीमेल हॉर्मोन्स ज़रूरत से ज़्यादा बनने लगते हैं। यह साइकिल क्यों शुरू होती है, यह हर पेशेंट में अलग होता है—डाइट, स्ट्रेस, एक्स्ट्रा फैट, और ग्लैंडुलर प्रॉब्लम्स इसके कारण हो सकते हैं।

PCOD के लगभग 70% केसेस में इन्सुलिन रेजिस्टेंस (Insulin resistance) एक बड़ा कारण होता है, जिसमें पैंक्रियास ज़रूरत से ज़्यादा इंसुलिन बनाता है, और यह इंसुलिन ओवरीज़ को ज़्यादा एण्ड्रोजन (मेल हॉर्मोन्स) बनाने के लिए स्टिमुलेट करता है।

आम लक्षण (Common Signs and Symptoms)

कोई भी दो महिलाएं PCOD से एक ही तरह से प्रभावित नहीं होती हैं, लेकिन कुछ कॉमन इंडिकेटर्स ये हैं:

  • पीरियड्स की गड़बड़ी (Menstrual Irregularities): पीरियड्स का न आना या बहुत इर्रेगुलर होना। कुछ महिलाओं को साल में सिर्फ 3 से 4 पीरियड्स आते हैं (वो भी बिना टाइम के), जब तक कि उन्हें मेडिसिन्स न दी जाएं।

  • मेल हार्मोन के असर (Hyperandrogenism): सिर के बाल पतले होना (hair thinning), एडल्ट एक्ने (मुंहासे), और चेहरे (अपर लिप और चिन) या प्यूबिक रीजन पर ज़्यादा/घने बाल आना।

  • एकैन्थोसिस निगरिकन्स (Acanthosis nigricans): स्किन पर डार्क, मखमली पैचेस आना (खासकर गर्दन, अंडरआर्म्स या ग्रोइन की सिकुड़न में)—यह PCOD से जुड़ी इंसुलिन रेजिस्टेंस का एक मज़बूत क्लिनिकल साइन है।

  • वजन और फैट डिस्ट्रीब्यूशन: मेल-पैटर्न में बॉडी फैट जमा होना, जिसमें थाइज़ और हिप्स की बजाय पेट (abdomen) के आस-पास ज़्यादा वजन बढ़ता है।

  • ओव्यूलेटरी पेन (Ovulatory Pain): मिड-साइकिल पेन जो दर्दनाक ओव्यूलेशन को दर्शाता है, यह ओवरीज़ के सरफेस के बढ़ने या ब्लॉक होने के कारण होता है।

  • डेवलपमेंटल साइंस: ब्रेस्ट बड्स का जल्दी आना।

  • फैमिली हिस्ट्री: मां, बहन या दादी/नानी को ऐसी ही कोई प्रॉब्लम होना।

  • इनफर्टिलिटी (बांझपन): रेगुलर, अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के बावजूद कंसीव (प्रेगनेंसी) करने में दिक्कत आना, क्योंकि इर्रेगुलर ओव्यूलेशन से हर महीने प्रेगनेंसी के चांसेस काफी कम हो जाते हैं।

डायग्नोसिस और कन्फर्मेशन

मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों को ठीक से देखना, और कुछ स्पेसिफिक टेस्ट्स से PCOD को कन्फर्म किया जाता है:

  1. FSH और LH हॉर्मोन लेवल्स: वैसे तो Follicle-Stimulating Hormone (FSH) और Luteinizing Hormone (LH) लेवल्स साइकिल के दौरान बदलते रहते हैं, लेकिन FSH और LH का रेश्यो नॉर्मली 2 से कम होना चाहिए। PCOD में, यह रेश्यो अक्सर उल्टा होकर 4 या उससे ज़्यादा हो जाता है।

  2. पेल्विक अल्ट्रासाउंड: अल्ट्रासाउंड में अक्सर एन्लार्ज्ड ओवरीज़ पर पार्शियली डेवलप्ड फॉलिकल्स का "हनीकॉम्ब" (मधुमक्खी के छत्ते जैसा) पैटर्न दिखता है।

  3. इंटरनेशनली रेकोग्नाइज़्ड रॉटरडैम क्राइटेरिया (Rotterdam Criteria) के अनुसार, PCOD के फॉर्मल डायग्नोसिस के लिए इन तीन में से कम से कम दो साइंस होने ज़रूरी हैं: इर्रेगुलर पीरियड्स, बढ़े हुए एण्ड्रोजन लेवल्स (क्लिनिकल या ब्लड टेस्ट से), और अल्ट्रासाउंड में दिखने वाली पॉलीसिस्टिक ओवरीज़।

क्या PCOD का मतलब इनफर्टिलिटी (बांझपन) है?

नहीं, PCOD का मतलब बिल्कुल बांझपन नहीं है।

इनफर्टिलिटी PCOD का सिर्फ एक पॉसिबल लक्षण (symptom) है, और PCOD वाली कई महिलाओं को फर्टिलिटी में कोई प्रॉब्लम नहीं होती। PCOD जैसी बड़ी बीमारी होने का डर और स्ट्रेस अक्सर बीमारी से ज़्यादा इनफर्टिलिटी का कारण बन जाता है। अगर फैमिली हिस्ट्री पॉजिटिव है (जैसे मां या दादी को भी था), तो यह इस बात का सबूत है कि फर्टिलिटी पॉसिबल है।

नॉर्मल महिलाएं हर महीने ओव्यूलेट करती हैं, जिससे उन्हें साल में कंसीव करने के लगभग 12 चांसेस मिलते हैं। PCOD वाली महिलाओं को डिलेड पीरियड्स की वजह से साल में शायद सिर्फ 3 से 4 चांसेस ही मिलते हैं, और अगर वो कंसीव कर भी लें, तो अर्ली मिसकैरिज (fetal loss) का रिस्क थोड़ा ज़्यादा होता है। हालांकि, सही ट्रीटमेंट और पेशेंस (धैर्य) के साथ, PCOD के कारण फर्टिलिटी प्रॉब्लम्स फेस करने वाली 80% से ज़्यादा महिलाएं एक हेल्दी बच्चे को जन्म देती हैं।

सर्जरी को इसका परमानेंट इलाज नहीं माना जाता। यह सिर्फ टेम्परेरी (करीब एक साल के लिए) हार्मोनल इम्बैलेंस को ठीक करती है और इसके काफी नुकसान (downsides) हैं, जैसे सर्जिकल अडेशंस (adhesions) का रिस्क (जो दोबारा सर्जरी होने तक फर्टिलिटी कम कर देते हैं) और सर्जरी के ट्रॉमा की वजह से कम्पलीट ओवेरियन फेलियर का छोटा रिस्क।

डाइट और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट

PCOD के पेशेंट्स, खासकर उनके लिए जो ओबेसिटी (मोटापा) से परेशान हैं, वेट लॉस और लाइफस्टाइल में बदलाव बहुत ज़रूरी हैं।

  • हाइड्रेशन: रोज़ाना 5 लीटर पानी पिएं।

  • एक्सरसाइज: वजन कम करने के लिए फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं। रेगुलर एरोबिक एक्टिविटीज जैसे वॉकिंग, जॉगिंग, या स्विमिंग करें। एक्टिव रहने के लिए किसी पार्टनर की मदद लें।

  • रेस्ट और स्ट्रेस मैनेजमेंट: अच्छा आराम करें, पैनिक (घबराहट) से बचें, और स्ट्रेस कम करने के लिए अपनी पसंद की एक्टिविटीज में हिस्सा लें।

  • Dietary "Do's" (क्या खाएं): एक फाइबर-रिच डाइट लें जिसमें फ्रेश फ्रूट्स और वेजिटेबल्स ज़्यादा हों (खासकर सिट्रस फ्रूट्स, अमरूद, आंवला, टमाटर, और शिमला मिर्च जिनमें विटामिन C और आयरन होता है)। साबुत दालें (whole pulses), सीरियल्स, और स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज) ज़्यादा खाएं।

  • Dietary "Don'ts" (क्या न खाएं): शुगर और हाई-फैट फूड्स (मार्जरीन, बटर, घी, चीज़, चॉकलेट्स, क्रीम्स, आइस क्रीम, पेस्ट्रीज, पराठे, कचौरी, समोसे, खस्ता) बिल्कुल अवॉयड करें। प्रोसेस्ड/कैंड फूड्स, पापड़, अचार, और चिप्स खाना बंद करें।

  • खास परहेज़: स्ट्रोंग चाय, कॉफ़ी, पान-मसाला, गुटखा, स्मोकिंग, और अल्कोहल से दूर रहें। अगर आप वजन कम कर भी लेते हैं, तो भी एक हेल्दी लाइफस्टाइल मेन्टेन रखना ज़रूरी है।

PCOD के लिए होम्योपैथिक अप्रोच

सिंथेटिक हॉर्मोन्स देकर ज़बरदस्ती पीरियड्स लाने की बजाय, होम्योपैथिक दवाइयां बॉडी के सिस्टम में गहराई तक जाकर बीमारी को ठीक करती हैं। इनसे नॉर्मल ओव्यूलेशन और पीरियड्स नेचुरल तरीके से आते हैं, जिससे आप नैचुरली कंसीव कर सकती हैं।

खास मदर टिंचर्स (Q)

  • Abroma radix-Q (एब्रोमा रेडिक्स): महिलाओं की एक अच्छी दोस्त; यह पीरियड्स को रेगुलेट करती है और ओवरऑल हेल्थ को इम्प्रूव करती है। (डोज़: आधे कप पानी में 2 बूंदें, दिन में दो बार)

  • Aegle marmelos-Q (एगल मार्मेलोस): हेल्थ ठीक करती है, पीरियड्स को रेगुलेट करती है, और पेट/आंत (intestinal) की प्रॉब्लम्स को दूर करती है। (डोज़: आधे कप पानी में 2 बूंदें, दिन में दो बार)

  • Blumea odorata-Q (ब्लूमिया ओडोराटा): यूट्रस से ब्लीडिंग, पाइल्स (बवासीर), नकसीर (nosebleeds), पीरियड्स में बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, और पेचिश (dysentery) के लिए। (डोज़: आधे कप पानी में 1 बूंद, दिन में तीन बार)

  • Viburnum opulus-Q (वाइबर्नम ओपुलस): लेट, कम (scanty) और बदबूदार पीरियड्स के लिए, जिसमें दर्द थाइज़ (जांघों) तक जाता हो। (डोज़: आधे कप पानी में 1 बूंद, दिन में तीन बार)

  • Sabal serrulata-Q (सबाल सेरुलाटा): अनडेवलप्ड ब्रेस्ट्स के लिए फायदेमंद; जनरल हेल्थ को ठीक करती है। (डोज़: आधे कप पानी में 2-5 बूंदें, दिन में तीन बार)

  • Sulphur-Q और Calendula-Q: नहाने के 10 लीटर पानी में दोनों दवाइयों की 1-1 बूंद डालें।

मेजर कॉन्स्टिट्यूशनल और मेंस्ट्रुअल रेमेडीज (दवाइयां)

Sepia (सीपिया) इसे हेरिंग की "फिनिशिंग रेमेडी" कहा जाता है। लेट और कम पीरियड्स के लिए सीपिया बहुत असरदार है। इसके लक्षणों में एब्डोमेन (पेट) में बेयरिंग-डाउन पेन (bearing-down pain - ऐसा लगना जैसे अंदर के ऑर्गन्स बाहर आ जाएंगे, जिसे रोकने के लिए पेशेंट अपने पैर क्रॉस करके बैठती है), बहुत ज़्यादा वीकनेस, कमर में खिंचाव वाला दर्द, पेट में "खालीपन" (gone feeling) और यूटेरिन स्टैसिस (blood flow रुकना) शामिल हैं। ऐसा लगता है जैसे यूट्रस (बच्चेदानी) को किसी ने ज़ोर से पकड़ कर अचानक छोड़ दिया हो। सुबह के वक्त और हिलने-डुलने (मोशन) से तकलीफ बढ़ती है; लेटने से आराम मिलता है (जो बेलाडोना से बिल्कुल उल्टा है)।

सीपिया से कम्पैरिज़न्स (तुलना):

  • Lilium tigrinum (लिलियम टिग्रिनम): इसमें भी "बेयरिंग-डाउन" वाली फीलिंग होती है (जिसे वल्वा पर हाथ दबाने से आराम मिलता है), लेकिन ओवरी और यूट्रस का दर्द बहुत ज़्यादा तेज़ होता है। पेशेंट बहुत नर्वस रहती है, काम में बिज़ी रहने पर बेटर फील करती है, और दोपहर में तकलीफ बढ़ती है। इसमें सेक्सुअल एक्साइटमेंट बढ़ जाता है।

  • Murex (म्यूरेक्स): सीपिया जैसी ही दवा है, लेकिन म्यूरेक्स में सेक्सुअल एक्साइटमेंट काफी ज़्यादा होता है, सिक्रीशंस (पीरियड्स और यूरिन) ज़्यादा होते हैं, और पेल्विस में दर्द वाली जगह पर दबाव (pressure) फील होता है।

  • Helonias (हेलोनियस): यूट्रस का लगातार एहसास होना; बहुत ज़्यादा उदासी (melancholy), कमर और पैरों में थकान वाला दर्द, और यूट्रस में भारीपन।

  • Sulphur (सल्फर): सीपिया के कॉम्प्लिमेंट्री है; इसमें भी बेयरिंग-डाउन वाली फीलिंग, पेट में "खालीपन" और बॉडी में हीट/गर्मी (flushes) फील होती है।

  • Kreosote (क्रियोसोट): सीपिया की तरह इसमें भी कमर दर्द और नीचे की तरफ प्रेशर लगता है, लेकिन क्रियोसोट में पीरियड्स बहुत ज़्यादा (copious) होते हैं (सीपिया में कम होते हैं), ल्यूकोरिया (वाइट डिस्चार्ज) जलन वाला होता है, और चलने-फिरने से कमर दर्द में आराम मिलता है। दोनों में इंटरकोर्स पेनफुल होता है और बदबूदार यूरिन में रेड सेडिमेंट आता है।

  • Stannum (स्टैनम): यूटेरिन प्रोलैप्स और उदासी, लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान है हार्ड स्टूल (टाइट लैट्रिन) के दौरान बच्चेदानी का नीचे आना। पेशेंट इतनी वीक होती है कि सुबह कपड़े पहनते वक्त भी उसको कई बार बैठना पड़ता है।

  • Nux vomica (नक्स वोमिका): सीपिया के मुकाबले "ड्रैगिंग डाउन" या "गोन (gone)" फीलिंग कम होती है, लेकिन इसमें गैस्ट्रिक (पाचन) सिम्पटम्स ज़्यादा होते हैं और अर्ली/हैवी पीरियड्स के दौरान सुबह उल्टी जैसा (nausea) लगता है।

  • Aloe (एलो): टिश्यू रिलैक्सेशन, भारीपन, और ड्रैगिंग फीलिंग सीपिया से भी ज़्यादा होती है, साथ ही बॉवेल/रेक्टम (लैट्रिन) का कंट्रोल छूट जाता है।

  • Podophyllum (पोडोफाइलम): पेल्विस में जलन और स्टूल पास करते वक्त बेयरिंग-डाउन फीलिंग, साथ में खास गैस्ट्रिक और डायरिया (दस्त) के सिम्पटम्स।

Pulsatilla और Phosphorus (कॉन्स्टिट्यूशन)

  • Pulsatilla (पल्साटिला): यह सॉफ्ट-स्पोकन, जल्दी रोने वाली, ब्लौंड (blonde) महिलाओं के लिए बेस्ट है (सीपिया की डिप्रेस्ड, चिड़चिड़ी ब्रुनेट महिलाओं से अलग)। पीरियड्स लेट, कम, अजीब और बदलते रहने वाले होते हैं। सर्दी ज़्यादा लगती है, पेल्विस में भारीपन लगता है, और पांव गीले होने के बाद पीरियड्स रुक जाते हैं। गर्म कमरे में तकलीफ बढ़ती है और खुली हवा में आराम मिलता है।

  • Phosphorus (फॉस्फोरस): यह लंबी और पतली (tall, slender) महिलाओं के लिए अच्छी है जिन्हें ल्यूकोरिया (सफ़ेद पानी) के बाद अर्ली और कम पीरियड्स आते हैं।

पेन, स्पैज़्म (ऐंठन), और इन्फ्लेमेशन के लिए दवाइयां

  • Actea racemosa: रिफ्लेक्स डिस्टर्बेंस के साथ रुके हुए, लेट या इर्रेगुलर पीरियड्स; मिसकैरिज का खतरा जिसमें दर्द पेट में एक साइड से दूसरी साइड तेज़ी से जाता है।

  • Caulophyllum: यूट्रस की ऐंठन और पीरियड्स का दर्द (dysmenorrhea); पेट के निचले हिस्से (hypogastric region) में हेवीनेस और टेंशन का एहसास। पीरियड्स पैसिव, जल्दी, और ज़्यादा आते हैं।

  • Belladonna: कंजेस्शन (congestion) वाला दर्दनाक डिसमेनोरिया; पीरियड्स ब्राइट रेड, गरम या डार्क रेड (खराब खून) होते हैं और उनमें बदबू होती है। बेयरिंग-डाउन लेटने से बढ़ता है और खड़े होने से आराम मिलता है।

  • Gelsemium: यूट्रस को जैसे किसी ने हाथ से निचोड़ रखा हो; पीरियड्स कम आना, साथ में आवाज़ बैठ जाना (aphonia) और गले में दर्द।

  • Bryonia: रुके हुए पीरियड्स (या किसी और जगह से ब्लीडिंग); डार्क और हेवी फ्लो, साथ में चुभन वाला दर्द और सिर फटने जैसा सिर दर्द।

  • Palladium: ओवरीज़ में सूजन/दर्द; यूट्रस में चाकू मारने जैसा दर्द; पेट में सोरनेस (soreness) और नीचे की तरफ प्रेशर जिसे मालिश करने (rubbing) से आराम मिलता है।

हैवी ब्लीडिंग (Hemorrhage) के लिए दवाइयां

  • Sabina और Millefolium: दोनों दवाइयां ब्राइट रेड, पार्शियली क्लॉटेड (थक्के वाले) ब्लड के लिए हैं। सबाइना में रुक-रुक कर (paroxysmal) ब्लीडिंग और पैरों में दर्द होता है, यह मेनोपॉज़ के आस-पास होने वाली ब्लीडिंग के लिए भी अच्छी है।

  • Ipecac: इसके सिम्पटम्स सबाइना जैसे ही हैं लेकिन इसमें लगातार नौज़िया (nausea/उल्टी जैसा) लगता रहता है।

  • Secale: लगातार होने वाली, डार्क, पतली, और बदबूदार ब्लीडिंग। पेशेंट को सर्दी लगती है, और बॉडी में झनझनाहट (tingling) होती है।

  • Bovista: ब्राइट, पतला खून जो एकदम फिक्स टाइम पर (periodic) आता है, ज़्यादातर रात या सुबह के वक्त।

  • Ustilago: ब्राइट रेड, थक्के वाला फ्लो। हल्की सी मैनिपुलेशन (जैसे चेक-अप) या यूट्रस के पीछे झुकने से ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।

  • Magnesia carbonica: डार्क, गाढ़ा खून जो मुख्य रूप से रात में आता है।

  • Causticum: पीरियड्स सिर्फ दिन के वक्त आते हैं जब पेशेंट चल-फिर रही होती है।

  • Trillium: एक्टिव, एक्यूट, ब्राइट रेड और बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, साथ में पेट में फेंटनेस (कमज़ोरी) और सैक्रोइलियक (कमर के निचले हिस्से) में दर्द।

  • Calcarea fluorica: बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग (flooding) के साथ बेयरिंग-डाउन दर्द, यूट्रस का अपनी जगह से हटना (prolapse), और थाइज़ में खिंचाव वाला दर्द।

अन्य खास थेरेप्यूटिक्स (Anya Khas Therapeutics)

  • Platina: बहुत ज़्यादा, थक्के वाले, जल्दी आने वाले पीरियड्स; प्राइवेट पार्ट्स में इर्रिटेशन (nymphomania); इंड्यूरेटेड/प्रोलैप्स्ड यूट्रस; बहुत सेंसिटिव और जलन वाली ओवरीज़।

  • Caladium: वजाइना में कीड़ों (worms) के रेंगने से होने वाली इर्रिटेशन और निम्फोमेनिया के लिए।

  • Crocus: डार्क, थक्के वाले पीरियड्स, जिसमें पेट में ऐसा लगता है जैसे कोई ज़िंदा चीज़ घूम रही हो।

  • Carbo animalis: यूटेरिन सर्विक्स की हार्डनिंग (यह सीपिया से अलग है क्योंकि इसमें पीरियड्स के बाद धड़कने वाला सिर दर्द होता है)।

  • Natrum hypochlorosum और Ferrum iodatum: बैठने पर ऐसा लगता है कि बच्चेदानी ऊपर की तरफ पुश हो रही है।

  • Senecio: कम पीरियड्स के साथ ब्लैडर में दर्द और यूरिन पास करने में दर्द (dysuria); पीरियड्स रुकने पर खांसी आना जिसमें खून आता हो, और नींद की कमी।

  • Aletris: यूट्रस की तकलीफें, ल्यूकोरिया (सफ़ेद पानी), बहुत ज़्यादा कब्ज़ (जिसमें लैट्रिन पास करने में ज़ोर लगाना पड़ता है), और बेहद थकान।

  • Hydrastis: सर्विक्स के अल्सर के साथ यूटेरिन प्रोलैप्स; गाढ़ा, पीला, और चिपचिपा डिस्चार्ज।

  • Ammonium muriaticum, Apis, और Arnica: इन तीनों में ग्रोइन (जांघों के जॉइंट्स) में ऐसी फीलिंग होती है जैसे मोच आई हो।

  • Apis: एमेनोरिया (पीरियड्स न आना), सिर में भारीपन (congestion), बेयरिंग-डाउन पेंस, और चीज़ें गिराने की आदत (awkwardness)।

  • Mel cum sale: प्रोलैप्सस यूटेरी या क्रोनिक मेट्राइटिस में हाइपोकोन्ड्रियम (पेट का ऊपरी हिस्सा) में एक साइड से दूसरी साइड तक सोरनेस (soreness) का एहसास।

  • Cantharis: निम्फोमेनिया के साथ ब्लैडर सिम्पटम्स; पीरियड्स ब्लैक, जल्दी, और बहुत ज़्यादा होते हैं। मोल्स/हाइडैटिड्स (moles/hydatids) को बाहर निकालने में मदद करती है।

  • Lachesis: कम, वीक, ब्लैक और बदबूदार पीरियड्स के साथ हिप्स में दर्द और लेफ्ट ओवरी में बेयरिंग-डाउन फीलिंग। फ्लो ठीक से आने पर तकलीफ में आराम मिलता है।

  • Alumina: पेल (pale) और कम पीरियड्स के साथ खून की कमी (क्लोरोसिस), और न पचने वाली चीज़ें (जैसे मिट्टी, चॉक) खाने की अजीब इच्छा।

  • Michella: एन्गोर्ज्ड (सूजी हुई) सर्विक्स और ब्लैडर की नैक पर इर्रिटेशन।

  • Graphites: ओवरवेट महिलाएं जिन्हें हमेशा सर्दी लगती रहती है और जिन्हें हरपेटिक इरप्शन्स (दाने) होते हैं। लेफ्ट ओवरी का बढ़ना, कम और लेट पीरियड्स, और ऐसा लगना कि यूट्रस वजाइना से बाहर आ जाएगा।

  • Natrum muriaticum: कम पीरियड्स (शुरू के 1-2 दिन कम, फिर ज़्यादा हो सकते हैं), इंटरकोर्स में दर्द, और यूरिन में लाल कण (red sediment)। इसमें सुबह तकलीफ बढ़ती है, कमर दर्द होता है, और पीरियड्स आने से पहले उदासी (sadness) काफी बढ़ जाती है। प्रोलैप्स रोकने के लिए पेशेंट को सुबह उठते ही बैठना पड़ता है।

  • Conium: लेट और कम पीरियड्स के साथ पेट में क्रैम्प्स। इससे पहले ब्रेस्ट्स ढीले या दर्दनाक तरीके से सूज जाते हैं। फाइब्रॉइड्स, सर्विक्स की हार्डनेस, ओवरी की सूजन और सप्रेस्ड सेक्सुअल फीलिंग्स के बुरे असर के लिए उपयोगी।

  • Calcarea carbonica: ऐसी महिलाएं जिनके पैर ठंडे और गीले (damp) रहते हैं, उनमें पीरियड्स जल्दी, बहुत ज़्यादा और लम्बे टाइम तक चलने वाले होते हैं।

  • Silicea: जल्दी और कम पीरियड्स जिनकी स्मेल बहुत तीखी (acrid) होती है; पीरियड्स के दौरान पैर ठंडे रहना; प्राइवेट पार्ट्स में जलन, सोरनेस और खुजली।

  • Kalium carbonicum: जल्दी, ज़्यादा, लम्बे समय तक चलने वाले पीरियड्स जिसके साथ तेज़ कमर दर्द और पूरी बॉडी में खुजली होती है।

  • पेनफुल/सेंसिटिव इंटरकोर्स (Painful/Sensitive Coitus): Platina, Sepia, Belladonna, Kreosote, Ferrum, Natrum muriaticum, Apis, और Thuja — इन सभी दवाओं में इंटरकोर्स के दौरान काफी सेंसिटिविटी और दर्द होता है।

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