अनदेखे घावों को भरना: Domestic Abuse के कारण होने वाले Depression से निपटना
घरेलू हिंसा और लगातार दुर्व्यवहार गंभीर डिप्रेशन, अनिद्रा और शारीरिक दर्द का कारण बनते हैं। जानें कि कैसे होम्योपैथिक दवा Bovista Lycoperdon 30 इन मानसिक और शारीरिक घावों को भरने में सुरक्षित रूप से मदद करती है।

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इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
परामर्श शुरू करेंअक्सर, महिलाएँ domestic violence (घरेलू हिंसा) का शिकार होती हैं और चुपचाप सब सहती हैं। बंद दरवाजों के पीछे, कई महिलाएँ लंबे समय तक भयानक emotional (भावनात्मक) और physical abuse (शारीरिक शोषण) बर्दाश्त करती हैं। समाज के डर, financial dependence (पैसे के लिए निर्भरता), या गहरे डर के कारण वो अपने परिवार के साथ ही रहती हैं। वो बस इस उम्मीद में जीती हैं कि कोई चमत्कार (miracle) होगा जो उनके हालात या उस इंसान को बदल देगा।
बदकिस्मती से, ऐसा चमत्कार अपने आप कभी नहीं होता। World Health Organization (WHO) के अनुसार, domestic abuse एक वैश्विक महामारी है। दुनिया भर में लगभग हर 3 में से 1 महिला ने अपनी ज़िंदगी में कभी न कभी physical या sexual violence का सामना किया है।
Domestic abuse समाज पर एक बहुत बड़ा श्राप है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह बर्ताव अपने आप ठीक नहीं होता। अगर सही समय पर कोई कदम न उठाया जाए, तो यह हिंसा और manipulation समय के साथ बढ़ता ही जाता है। Psychological research के अनुसार, domestic violence के मामलों में एक "Cycle of Abuse" (शोषण का चक्र) होता है। इसमें पहले तनाव बढ़ता है, फिर abuse होता है, और आखिर में माफ़ी माँग कर सब ठीक करने का दिखावा (honeymoon phase) किया जाता है। यही चक्र पीड़ित को एक psychological लूप में फंसा देता है, जिससे चमत्कार होने की उनकी झूठी उम्मीद और बढ़ जाती है।]
शरीर और दिमाग पर इसका गहरा असर (The Heavy Toll)
जब कोई व्यक्ति लगातार डर, बेइज्जती और शारीरिक चोट के चक्र से गुजरता है, तो इंसान का दिमाग इसे बर्दाश्त नहीं कर पाता। पीड़ित महिला गहरे depression का शिकार हो जाती है। Domestic abuse के मामले में depression सिर्फ उदासी नहीं है; इसका असर पूरे शरीर पर होता है।
क्योंकि हमारा दिमाग और शरीर गहराई से जुड़े हुए हैं, लंबे समय तक abuse सहने का trauma कई तरह के शारीरिक और मानसिक लक्षणों (symptoms) के रूप में बाहर आता है। Holistic medicine में यह साबित हो चुका है कि भावनाओं को लंबे समय तक दबाने और trauma की वजह से शरीर का nervous system (fight-or-flight response) हमेशा alert पर रहता है। यह लगातार रहने वाला स्ट्रेस हमारी immunity को कमज़ोर कर देता है और psychosomatic बीमारियों का कारण बनता है, जिसका मतलब है कि भावनात्मक दर्द असल में शारीरिक दर्द में बदल जाता है।
Depression से जूझ रही domestic abuse की शिकार महिला अक्सर नीचे दिए गए लक्षणों को महसूस करती है:
नींद की समस्याएँ (Sleep Disturbances): लगातार स्ट्रेस से शरीर की internal clock पूरी तरह बिगड़ जाती है। या तो पीड़ित को बिलकुल नींद नहीं आती (Insomnia) घबराहट के कारण, या फिर वो बहुत ज़्यादा सोती हैं (Hypersomnia) ताकि वो अपनी कड़वी सच्चाई से बच सकें।
लगातार थकान (Chronic Fatigue): Emotional abuse का बोझ शरीर की सारी एनर्जी चूस लेता है। पूरी रात सोने के बाद भी, उठने पर भारी थकान महसूस होती है जिससे रोज़मर्रा के छोटे-छोटे काम भी बहुत मुश्किल लगते हैं।
सिरदर्द (Headaches): लगातार दिमागी स्ट्रेस, आंसुओं को दबाने और गर्दन/कंधों की मांसपेशियों में जकड़न की वजह से टेंशन वाले सिरदर्द और माइग्रेन होना बहुत आम है।
चिड़चिड़ापन (Irritability): जब nervous system थक जाता है, तो सहने की क्षमता खत्म हो जाती है। पीड़ित को छोटी-छोटी बातों पर बहुत गुस्सा या चिड़चिड़ापन आ सकता है, जो असल में उनके अंदर छिपे दुख और बेबसी का ही एक रूप है।
भूख न लगना (Loss of Appetite): Depression और anxiety अक्सर पाचन तंत्र (digestive system) को धीमा कर देते हैं। खाने का मन नहीं करता, जिससे वज़न कम होने लगता है और शारीरिक कमज़ोरी आ जाती है।
शरीर में अजीब सा दर्द (Vague Pains): Trauma अक्सर शरीर के हिस्सों में बस जाता है। पीड़ित अक्सर ऐसे दर्द की शिकायत करते हैं जिसका कोई मेडिकल कारण समझ नहीं आता—जैसे बिना वजह कमर दर्द, जोड़ों का दर्द या मांसपेशियों में दर्द।
Sexual Urge में कमी: जब इंसान असुरक्षित महसूस करता है और depression में होता है, तो सेक्सुअल इच्छा का खत्म हो जाना बहुत natural है। जब शरीर survival mode (बचने की जद्दोजहद) में होता है, तो ऐसी इच्छाएं अपने आप बंद हो जाती हैं।
आत्महत्या के विचार (Suicidal Thoughts): Depression के सबसे बुरे दौर में, जब पीड़ित को हर तरफ अँधेरा और बेबसी नज़र आती है, तो उनके मन में आत्महत्या के ख्याल आने लगते हैं। दुख की बात यह है कि अगर abuse चलता रहे और इलाज न हो, तो यह ख्याल असल में सुसाइड की कोशिश में बदल सकते हैं।
Trauma से उबरने का Homeopathic तरीका
Domestic abuse से बाहर आने और ठीक होने के लिए कई चीज़ों की ज़रूरत होती है—जैसे पीड़ित की safety पक्की करना और psychological counseling देना। लेकिन, depression और trauma के गहरे असर से शरीर और दिमाग को उबारने के लिए Homeopathy एक बहुत ही असरदार, सुरक्षित और जेंटल तरीका देती है।
Homeopathy इंसान का संपूर्ण (holistic) इलाज करने के सिद्धांत पर काम करती है। यह मानती है कि मानसिक trauma शरीर की "vital force" (जीवन शक्ति) में गड़बड़ी पैदा करता है। सिर्फ नींद की गोलियों से लक्षणों को दबाने के बजाय, इस अंदरूनी असंतुलन को ठीक करना बहुत ज़रूरी है ताकि शारीरिक और मानसिक दोनों बीमारियां जड़ से खत्म हो सकें।
लंबे समय तक हुए emotional abuse के कारण होने वाले depression, थकान, शरीर दर्द और मानसिक थकावट (nervous exhaustion) को ठीक करने के लिए एक बहुत ही खास दवा की सलाह दी जाती है।
Bovista Lycoperdon एक homeopathic दवा है जिसे पफ़बॉल फंगस से बनाया जाता है। Homeopathic विज्ञान में, यह दवा खासतौर पर उन लोगों के लिए सुझाई जाती है जो अत्यधिक दिमागी थकावट, hypersensitivity (ज़रूरत से ज़्यादा संवेदनशील होना) और ऐसे शारीरिक दर्दों से जूझ रहे हैं जो लंबे समय तक भावनाओं को दबाने और गहरे emotional trauma की वजह से पैदा हुए हैं।
सुझाई गई दवा और खुराक (Recommended Medicine & Dosage)
अगर आप या आपका कोई जानने वाला domestic trauma झेलने की वजह से इन लक्षणों का सामना कर रहा है, तो emotional balance और शारीरिक ताकत को वापस पाने के लिए नीचे दी गई homeopathic दवा बहुत मददगार साबित होगी:
दवा: BOVISTA LYCOPERDON-30 लें खुराक (Dosage): रोज़ाना दो बार, एक कप पानी में 1 बूँद डालकर पियें।
नोट: हालाँकि homeopathic दवाएँ depression के शारीरिक और मानसिक लक्षणों को ठीक करने में बहुत असरदार हैं, लेकिन इनका सबसे अच्छा असर तब होता है जब मरीज एक सुरक्षित माहौल (safe environment) में हो। अपने इलाज के साथ-साथ अपनी सुरक्षा पक्की करने के लिए कृपया स्थानीय domestic violence हेल्पलाइन्स, सपोर्ट ग्रुप्स या किसी भरोसेमंद इंसान की मदद ज़रूर लें।
गंभीर स्थिति का स्वयं उपचार न करें
इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
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