थायरॉइड (Thyroid) डिसफंक्शन के लिए क्लिनिकल गाइड: थायरोटॉक्सिकोसिस, हाइपरथायरायडिज्म और होम्योपैथिक उपचार
हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) को मैनेज करने के लिए होम्योपैथिक दवाओं, डाइट और खास क्लिनिकल गाइडलाइन्स के बारे में विस्तार से जानें।

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परामर्श शुरू करेंबीमारी को समझना (Understanding the Condition)
थायरॉइड गर्दन के निचले हिस्से में मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि (gland) है जो हमारे शरीर के मुख्य मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करती है। जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो मेटाबॉलिज्म में भारी गड़बड़ी हो सकती है।
थायरोटॉक्सिकोसिस (Thyrotoxicosis) एक हाइपरमेटाबोलिक सिंड्रोम है। यह सीधे तौर पर ब्लड में थायरॉइड हार्मोन (खासकर फ्री T4, T3 या इन दोनों) का लेवल बढ़ जाने के कारण होता है।
हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) थायरोटॉक्सिकोसिस का ही एक प्रकार है जिसमें थायरॉइड ग्रंथि बहुत तेजी से हार्मोन बनाने और रिलीज करने लगती है। हालांकि कई मरीजों में थायरोटॉक्सिकोसिस सीधे हाइपरथायरायडिज्म की वजह से होता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। कुछ लोगों में थायरॉइड ग्रंथि में सूजन (thyroiditis) के कारण भी यह हो सकता है। ऐसे मामलों में, ग्रंथि नया हार्मोन नहीं बनाती, बल्कि पहले से स्टोर किए हुए हार्मोन को ही ब्लड में छोड़ देती है। ग्रेव्स डिजीज (Graves' disease), जो कि एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, दुनिया भर में हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है।

जनरल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल (General Management Protocol)
थायरॉइड की समस्या वाले मरीजों के लिए दवा और डाइट का सही रूटीन बहुत जरूरी है। मरीजों को नीचे दिए गए प्रोटोकॉल अपने डॉक्टर की सलाह और परमिशन के बाद ही शुरू करने चाहिए।
दवा का मिश्रण (Medicinal Mixture)
होम्योपैथी में, मदर टिंचर ('Q' या 'θ' से दर्शाया गया) दवा का सबसे प्योर और बेस फॉर्म होता है, जिसका उपयोग सीधे ऑर्गन को सपोर्ट करने के लिए किया जाता है।
रोजाना यह मिश्रण तैयार करें:
50 ml अच्छी तरह उबला हुआ पानी लें और इसे हल्का गर्म (lukewarm या body temperature) होने तक ठंडा होने दें।
इसमें Crataegus Oxyacantha-Q (क्रेटेगस ऑक्सीकैंथा-Q) की 100 बूंदें डालें।
इसमें Spongia Tosta-Q (स्पॉन्जिया टोस्टा-Q) की 1 बूंद डालें।
इसे अच्छी तरह मिक्स करें।
खुराक (Dosage): हर 8 घंटे में इस मिश्रण का लगभग 5 ml मरीज को दें।
इंटरकरंट दवा (Intercurrent Remedy)
Thuja Occidentalis-30 (थूजा 30): हर 15 दिन में (fortnightly) एक बार आधे कप पानी में 1 बूंद लें। थूजा एक डीप-एक्टिंग रेमेडी है जिसका इस्तेमाल शरीर की अंदरूनी रुकावटों (miasmatic blockages) को दूर करने के लिए किया जाता है, खासकर जब ग्लैंड्स सूज रही हों या बढ़ रही हों।
डाइट से जुड़ी सलाह (Dietary Guidelines)
हाइपरमेटाबोलिक स्थिति को मैनेज करने में न्यूट्रिशन बहुत बड़ा रोल प्ले करता है।
क्या खाएं: ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां नियमित रूप से खूब खाएं।
क्या न खाएं: तीखा (spicy), तला-भुना और जंक फूड बिल्कुल अवॉयड करें। हाइपरथायरायडिज्म डाइजेशन सिस्टम पर बहुत दबाव डालता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है; इसलिए, सादा और हेल्दी खाना खाने से पाचन तंत्र पर एक्स्ट्रा स्ट्रेस नहीं पड़ता और कमजोरी नहीं आती।
मटेरिया मेडिका: विशिष्ट होम्योपैथिक दवाइयां (Specific Therapeutics)
नीचे दी गई दवाइयां मरीज के लक्षणों (symptomatology) के आधार पर दी जाती हैं। होम्योपैथी का मूल सिद्धांत 'Similia Similibus Curentur' (Like cures like) है, जिसका मतलब है कि चुनी गई दवा मरीज के पूरे लक्षणों और प्रकृति (constitution) से पूरी तरह मिलनी चाहिए।
थायरॉइड और हार्ट से जुड़ी प्रमुख दवाइयां
Spongia Tosta (स्पॉन्जिया टोस्टा)
प्रोफाइल: बच्चों और महिलाओं के लिए बहुत सूटेबल, खासकर जिनकी स्किन ढीली (lax skin) और मांसपेशियां कमजोर हैं।
लक्षण: थोड़ा सा काम करने पर भी बहुत ज्यादा थकान और शरीर में भारीपन। इसके साथ ही बहुत घबराहट (anxiety), पीला चेहरा, जी मिचलाना और सांस लेने में तकलीफ होती है। गले और गर्दन की मांसपेशियों में दर्द और जकड़न महसूस होती है।
हार्ट के लक्षण: दिल की धड़कन बहुत तेज होना (Violent palpitation), दर्द और हांफना। मरीज अक्सर आधी रात के बाद दम घुटने के अहसास, डर और घबराहट के साथ उठ जाता है। पल्स तेज और हार्ड होती है। यह एंजीना पेक्टोरिस (सीने में दर्द), गर्मी, और घबराहट वाले पसीने में भी काम आती है।
ग्लैंड के लक्षण: थायरॉइड ग्रंथि सूजी हुई और सख्त (hard) हो जाती है। रात में दम घुटने वाले अटैक आते हैं और चुभन वाला दर्द (stitching pains) होता है।
एक्स्ट्रा डोज नोट: डॉक्टर के इंस्ट्रक्शन के आधार पर, Spongia-Q की 1 बूंद दिन में दो बार खाना खाने के बाद एक कप पानी में भी ली जा सकती है।
Iodine (आयोडियम / आयोडीन)
प्रोफाइल: इस दवा की सबसे बड़ी पहचान है अत्यधिक भूख (extreme hunger), लेकिन बहुत खाने के बावजूद भी मरीज दुबला (emaciated) होता जाता है।
लक्षण: ग्लैंड्स का काम बुरी तरह प्रभावित होता है, जिससे शरीर में बहुत सुस्ती (sluggishness) और धीमापन आ जाता है।
Bromium (ब्रोमियम)
प्रोफाइल: यह दवा हल्के रंग के बालों और नीली आंखों वाले लोगों के लिए ज्यादा सूटेबल है।
लक्षण: सभी एक्यूट लक्षण खत्म होने के बाद भी बहुत ज्यादा कमजोरी और थकान बनी रहती है। इसका एक खास शारीरिक लक्षण यह है कि हाथ (forearms) बर्फ जैसे ठंडे रहते हैं। अक्सर मरीज की आंखें बड़ी और बिना झपके घूरती हुई सी (thyroid stare) लगती हैं।
Thyroidinum (थायरॉइडिनम)
लक्षण: खून की कमी (anaemia), दुबलापन, मांसपेशियों में बहुत कमजोरी और बहुत ज्यादा पसीना आना। न्यूरोलॉजिकल लक्षणों में सिरदर्द, चेहरे और अंगों में नर्वस कंपन (tremors), झुनझुनी और यहां तक कि पैरालिसिस शामिल हैं।
क्लिनिकल संकेत: हार्ट रेट बढ़ जाना (tachycardia), आंखें बाहर की ओर उभरना (exophthalmos), और पुतलियों का फैलना।
अन्य उपयोग: मायक्सेडेमा और क्रेटिनिज्म जैसी बीमारियों में इसके रिजल्ट बहुत अच्छे हैं। इसके अलावा, रुमेटीइड अर्थराइटिस, बच्चों का सूखना (infantile wasting), रिकेट्स, और हड्डी टूटने के बाद देरी से जुड़ने में भी यह कारगर है। मरीज को मीठा खाने की बहुत क्रेविंग होती है। थायरॉइडिनम जैसे सरकोड (Sarcodes) हेल्दी ग्लैंडुलर टिश्यू से बनाए जाते हैं और इंसानी ऑर्गन के फंक्शन को बैलेंस करने का काम करते हैं।

कॉन्स्टिट्यूशनल और न्यूट्रिशनल दवाइयां
Fluoricum Acidum (फ्लोरिकम एसिडम)
प्रोफाइल: खराब न्यूट्रिशन के कारण होने वाली बीमारियों में काम आती है।
लक्षण: हड्डियों (खासकर लंबी हड्डियों) की गहरी बीमारियां। फिस्टुला और व्हिटलो (उंगलियों में इन्फेक्शन) का खतरा रहता है। इसके साथ अपच (dyspepsia), डायबिटीज और वैरिकोज वेंस की समस्या होती है। मर्करी (Mercury) या साइलेशिया (Silicea) के ज्यादा इस्तेमाल, या ज्यादा शराब (whiskey) पीने के बाद लिवर बढ़ने और सख्त होने पर यह दी जाती है।
Natrum Muriaticum (नेट्रम म्यूरिएटिकम)
प्रोफाइल: पतली गर्दन वाले ऐसे बच्चों के लिए जो बहुत ज्यादा खाते हैं, लेकिन फिर भी दुबले ही रहते हैं।
लक्षण: बहुत ज्यादा प्यास (ravenous thirst) लगना और मुंह व गले में लगातार गर्मी और सूखापन महसूस होना, जो पानी पीने से थोड़ी देर के लिए ठीक हो जाता है।
बच्चों और विकास (Paediatric & Developmental) से जुड़ी दवाइयां
Calcarea Phosphorica (कल्केरिया फॉस्फोरिका)
प्रोफाइल: पतले, कमजोर बच्चे जिन्हें ग्लैंड्स और हड्डियों (osseous) की बीमारियां जल्दी होती हैं।
लक्षण: विकास में देरी, बड़ा सिर, और दांत देर से आना। रीढ़ की हड्डी में झुकाव (curvature) होता है और वह इतनी कमजोर होती है कि शरीर का वजन नहीं संभाल पाती। गर्दन बहुत पतली होती है। बच्चे को लगातार उल्टी होती है और हरे, चिपचिपे (slimy), और बिना पचे दस्त आते हैं।
Magnesia Carbonica (मैग्नेशिया कार्बोनिका)
प्रोफाइल: कमजोर, बीमार बच्चे जिन्हें सही न्यूट्रिशन नहीं मिल रहा है।
लक्षण: दूध पीते ही पेट में दर्द होता है और बिना पचा दूध उल्टी के जरिए बाहर आ जाता है। पेट में मरोड़ वाला दर्द (colicky pain) होता है। दस्त खट्टे और घास जैसे हरे रंग के होते हैं। बच्चे के मुंह में अक्सर दर्दनाक छाले (ulcers) हो जाते हैं।
Calcarea Carbonica (कल्केरिया कार्बोनिका)
प्रोफाइल: इसे तीन खास लक्षणों से आसानी से पहचाना जा सकता है: सिर पर बहुत ज्यादा पसीना आना, पैर ठंडे और नम (damp) रहना, और पेट बहुत ज्यादा सूजा/फूला हुआ (swollen abdomen) होना।
Hepar Sulphuris Calcareum (हीपर सल्फ)
प्रोफाइल: यह दवा Sulphur और Calcarea के बीच की स्थिति में काम आती है।
लक्षण: डाइजेशन बहुत ज्यादा कमजोर होना। दिन के समय और खाना खाने के तुरंत बाद दस्त की समस्या बढ़ जाना। मल बिना पचा हुआ और खट्टा होता है, और मरीज के पूरे शरीर से एक खास खट्टी महक (sour smell) आती है।
गंभीर स्थिति का स्वयं उपचार न करें
इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
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