फ्लू को प्राकृतिक रूप से हराएं: इन्फ्लूएंजा (Flu) के लिए सबसे असरदार होम्योपैथिक दवाएं
इन्फ्लूएंजा या फ्लू से जल्दी और प्राकृतिक रूप से ठीक होने के लिए प्रमुख होम्योपैथिक दवाओं के बारे में जानें। जेल्सीमियम, ब्रायोनिया और एकोनाइट जैसी असरदार दवाओं के उपयोग और लक्षणों की पूरी जानकारी पढ़ें।

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परामर्श शुरू करेंइन्फ्लूएंजा (फ्लू) के लिए होम्योपैथिक दृष्टिकोण को समझना
होम्योपैथी चिकित्सा की एक समग्र (holistic) प्रणाली है जो "समान से समान की चिकित्सा" (सिमिलिया सिमिलिबस क्यूरेंटुर) के मूल सिद्धांत पर आधारित है। इस चिकित्सा पद्धति के अनुसार, जो पदार्थ किसी स्वस्थ व्यक्ति में विशिष्ट लक्षण पैदा कर सकता है, उसी पदार्थ का उपयोग अत्यधिक पतले (diluted) और सूक्ष्म रूप में करके बीमार व्यक्ति की प्राकृतिक उपचार क्षमता को जगाया जा सकता है, बशर्ते उसमें बिल्कुल वही लक्षण मौजूद हों। किसी बीमारी का केवल उसके मेडिकल नाम से इलाज करने के बजाय, होम्योपैथिक चिकित्सक मरीज के अद्वितीय शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लक्षणों की रूपरेखा पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी का इलाज करते समय, एक होम्योपैथ मरीज की विशिष्ट स्थिति का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करता है। इसमें यह विश्लेषण करना शामिल है कि बीमारी किस वजह से हुई (कारण, जैसे कि किसी विशेष प्रकार का मौसम), उनके दर्द की सटीक प्रकृति क्या है, उनकी प्यास का स्तर क्या है, और उनकी "मोडेलिटीज़" (modalities) क्या हैं—यानी किन चीजों से लक्षणों में आराम मिलता है या वे बदतर होते हैं (जैसे गति, आराम, या तापमान)। मरीज के विशिष्ट लक्षणों का होम्योपैथिक दवा के ज्ञात लक्षणों से सटीक मिलान करके, शरीर को बीमारी दूर करने और स्वास्थ्य बहाल करने के लिए धीरे से प्रेरित किया जाता है।
सामान्य इन्फ्लूएंजा (फ्लू) की दवाएं
ACONITE (एकोनाइट)
कारण (Causation): ठंड, शुष्क मौसम और तेज ठंडी हवाओं के कारण होने वाली बीमारी (जेल्सीमियम के विपरीत)।
शुरुआत (Onset): ठंड लगने के साथ बुखार की अचानक शुरुआत।
नाड़ी (Pulse): धड़कती हुई (Throbbing)।
मानसिक स्थिति: बहुत अधिक बेचैनी और चिंता।
GELSEMIUM (जेल्सीमियम)
शरीर और अंग: भारीपन की विशेषता—विशेष रूप से सिर, पलकों और अंगों में भारीपन, साथ ही सामान्य थकान।
कारण/मौसम: हल्की सर्दियों के कारण होने वाली सर्दी और बुखार (एकोनाइट के विपरीत)।
ठंड लगना (Chills): पीठ में ठंड लगना; ठंड और गर्मी का एक-दूसरे के पीछे आना (कभी ठंड, कभी गर्मी)।
सिरदर्द: सिर फटने जैसा दर्द जो गर्दन से शुरू होकर सिर के ऊपर से होते हुए आंखों और माथे तक जाता है। भरपूर पेशाब होने से सिरदर्द में आराम मिलता है।
प्यास: मरीज को प्यास नहीं लगती है।
EUPATORIUM PERFOLIATUM (यूपेटोरियम पर्फोलिएटम)
पीठ और अंग: तेज दर्द, ऐसा महसूस होना जैसे हड्डियां टूट गई हों। मांस में दर्द के साथ सभी हड्डियों में दर्द। हड्डियां टूटी हुई, अपनी जगह से खिसकी हुई या टूटने वाली लगती हैं। मरीज दर्द के डर से हिलने की हिम्मत नहीं करता (पायरोजन के विपरीत)।
सिरदर्द: सिर फटने जैसा दर्द; यहाँ भी मरीज दर्द के डर से हिलने की हिम्मत नहीं करता (पायरोजन के विपरीत)।
सिहरन और ठंड: पीठ में ठंड लगना (जेल्सीमियम और पायरोजन के समान), जो आमतौर पर सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे के बीच शुरू होता है।
अन्य लक्षण: आंखों के गोलों (eyeballs) में दर्द (ब्रायोनिया और जेल्सीमियम के समान)। पित्त (bile) की उल्टी भी हो सकती है। यह "हड्डी तोड़ बुखार" (डेंगू) के लिए एक जानी-मानी दवा है।
PYROGEN (पायरोजन)
बुखार: धीमी नाड़ी के साथ तेज बुखार, या इसका उल्टा। नाड़ी और तापमान के बीच का अनुपात बिगड़ जाता है।
नाड़ी और धड़कन: बहुत तेज नाड़ी के साथ हिंसक धड़कन।
ठंड लगना: ऐसा महसूस होना कि "कोई भी आग मरीज को गर्म नहीं कर सकती" (नक्स वोमिका और जेल्सीमियम के समान)। दिल की तेज धड़कन के साथ पीठ में रेंगती हुई ठंड महसूस होना।
सिरदर्द: तीव्र बेचैनी के साथ सिर फटने जैसा दर्द।
संवेदनाएं (Sensations): बिस्तर बहुत सख्त लगता है; मरीज को ऐसा लगता है जैसे उसे पीटा गया हो और चोट लगी हो (आर्निका के समान)।
गति (Movement): मरीज को हिलना-डुलना शुरू करने पर आराम मिलता है (रस्टॉक्स के विपरीत)। उन्हें तीव्र बेचैनी होती है, क्षणिक राहत के लिए उन्हें चलते रहने, हिलने-डुलने या करवटें बदलने की आवश्यकता होती है। कमर और ऊपरी जांघ की मांसपेशियों में भयानक दर्द होता है, जिससे एक पल के लिए भी शांत रहना असंभव हो जाता है।
पेशाब: बुखार के दौरान साफ पानी जैसा भरपूर पेशाब आना।
BAPTISIA (बैप्टीशिया)
शुरुआत: तेजी से शुरुआत, मरीज जल्दी से सुस्त, टाइफाइड जैसी स्थिति में चला जाता है।
चेहरा: गहरा लाल रंग, ऐसा चेहरा जैसे नशा किया हो या सुध-बुध खो बैठा हो।
तापमान: तेज बुखार; मरीज लाल, सांवला और बेहोशी की हालत (comatose) में दिखाई देता है। सवालों का जवाब देते-देते वे सो सकते हैं।
गैस्ट्रिक फ्लू (पेट का फ्लू): अत्यधिक थकान और कमजोरी के साथ भयानक दस्त और उल्टी के अचानक दौरे। (ऐसे मामलों में, बैप्टीशिया आश्चर्यजनक रूप से अचानक रिकवरी सुनिश्चित करेगी)।
निमोनिया: फ्लू से संबंधित निमोनिया के लिए संकेतित, जिसमें मरीज का चेहरा नशे में धुत जैसा दिखता है।
दुर्गंध: बहुत बदबूदार मुंह, बदबूदार गला, और बहुत ही दुर्गंधयुक्त स्राव (मर्क्यूरियस के समान)।
विचित्र लक्षण: शरीर के अंगों के अलग होने का एहसास, ऐसा महसूस होना जैसे शरीर "बिखर गया है और खुद को एक साथ नहीं कर पा रहा है" (पेट्रोलियम और पायरोजन के समान)।
BRYONIA (ब्रायोनिया)
सामान्य स्थिति: मरीज चिड़चिड़ा होता है, बिल्कुल शांत लेटना चाहता है, और अकेला रहना चाहता है। यह प्लूरिसी (pleurisy) और प्लूरो-निमोनिया के लिए उपयुक्त है।
जीभ और प्यास: सफेद जीभ। बहुत अधिक मात्रा में ठंडा तरल पदार्थ पीने की प्यास (फास्फोरस के समान)।
बुखार/गर्मी: सूखी गर्मी के दौरे जो हर हलचल और हर शोर के कारण बढ़ जाते हैं (नक्स वोमिका और जेल्सीमियम के विपरीत)।
सिरदर्द/दर्द: दबाव देने से दर्द में आराम मिलता है और हिलने-डुलने से दर्द बढ़ जाता है (यूपेटोरियम पर्फ के समान)। खांसने से सिर में दर्द होता है।
मानसिक स्थिति: व्यापार या काम की चिंता; व्यापार के सपने; प्रलाप (delirium) की स्थिति जहां मरीज "घर जाना चाहता है।"
RHUS TOXICODENDRON (Rhus Tox) (रस्टॉक्स)
मानसिक स्थिति: जहर दिए जाने का डर। चिंता और डर जो रात में बदतर हो जाते हैं (एकोनाइट के समान)। बिना कारण जाने रोता है (पल्सेटिला के समान)।
गति (Movement): पहली बार हिलने-डुलने पर, मरीज को अकड़न, लंगड़ापन और चोट जैसा दर्द महसूस होता है (पायरोजन के विपरीत)। लगातार गति करने (चलने-फिरने) पर यह अकड़न कम हो जाती है जब तक कि मरीज कमजोर न हो जाए और उसे आराम न करना पड़े; हालाँकि, बेचैनी अंततः उन्हें फिर से आगे बढ़ने के लिए मजबूर करती है। सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब मरीज आराम कर रहा होता है और बिना हिले-डुले रहता है (ब्रायोनिया के विपरीत)।
कारण: ठंडा, नम मौसम, या पसीना आने पर ठंडी नमी के संपर्क में आने के कारण होता है (डल्कामारा के समान)।
लक्षण: तेज बुखार (टाइफाइड रूप सहित, बैप्टीशिया के समान), तीव्र बेचैनी, प्यास, अत्यधिक कमजोरी, और हड्डियों में गंभीर दर्द (यूपेटोरियम पर्फ के समान)।
होम्योपैथिक सिद्धांतों पर एक नोट: दवाएं अजीब लक्षण पैदा करती हैं। जहाँ ये लक्षण दवा और मरीज दोनों में पूरी तरह मेल खाते हैं, वहाँ बीमारी खत्म हो जाती है और स्वास्थ्य लौट आता है। यह तीव्र (acute) और सरल बीमारियों में सबसे स्पष्ट रूप से देखा जाता है। जब आप किसी मरीज को ऐसी दवा देते हैं जो उसके सटीक लक्षण पैदा कर सकती है, तो इसे इतनी छोटी खुराक में दिया जाना चाहिए जिससे उसकी संवेदनशील स्थिति बिना किसी अनावश्यक वृद्धि और कष्ट के प्रतिक्रिया दे सके।
MERCURIUS SOLUBILIS (Merc Sol) (मर्क्यूरियस सोल)
पसीना: बहुत अधिक और बहुत बदबूदार पसीना। पसीना आने से कोई आराम नहीं मिलता और अक्सर मरीज को बुरा महसूस होता है।
मुंह: बहुत बदबूदार मुंह (बैप्टीशिया के समान) और लार से दुर्गंध आना।
सर्दी-जुकाम: ऐसी सर्दी जो छाती तक फैल जाती है।
NUX VOMICA (नक्स वोमिका)
पीना: कुछ भी पीने के तुरंत बाद सिहरन और ठंड लगना।

ठंड लगना: जरा सी भी हलचल, खुली हवा के जरा से भी संपर्क, या हवा के हल्के झोंके से ठंड लग जाना। मरीज खुद को गर्म नहीं कर पाता; यह भयंकर ठंडक स्टोव की गर्मी या बिस्तर के कवर से भी दूर नहीं होती।
लक्षण: एक घंटे तक सिहरन और ठंड लगना। मरीज खुली हवा में जाने से डरता है। अंगों में सिहरन और खिंचाव वाले दर्द के साथ बुखार जैसे दौरे पड़ना। ठंड लगने से होने वाली गंभीर बीमारियां अक्सर इस दवा से दूर हो जाती हैं।
इन्फ्लूएंजा के बाद की दवाएं (बुरी तरह से ठीक होने पर)
GELSEMIUM (जेल्सीमियम)
उस मरीज के लिए जो कुछ हफ्ते पहले फ्लू होने के बाद से पूरी तरह ठीक नहीं हो पा रहा है।
तापमान लगभग 99°F (37.2°C) रहता है।
न पूरी तरह बीमार महसूस करता है और न ही पूरी तरह स्वस्थ।
बारी-बारी से गर्मी और ठंड लगती रहती है।
अंगों और पलकों में लगातार कमजोरी और भारीपन बना रहता है।
CHINA (चाइना)
बीमारी के बाद लगातार कमजोरी और ठंड लगना।

मरीज में खून की कमी, पीलापन और कमजोरी दिखाई देती है।
छूने, हिलने-डुलने और ठंडी हवा के प्रति संवेदनशील।
लक्षण एक दिन छोड़कर (alternate days) बदतर हो जाते हैं।
अंगों में थकान के साथ लगातार खिंचाव करने, हिलने या स्थिति बदलने की इच्छा।
KALI PHOS (काली फॉस)
सामान्य, लगातार बनी रहने वाली कमजोरी और उदासी/निराशा की भावना के लिए।
ARSENICUM (आर्सेनिकम)
ठंड लगना, गंभीर बेचैनी, चिंता, डर और मौत का डर (एकोनाइट के समान) इसकी विशेषता है।
अत्यधिक कमजोरी और अतिसंवेदनशीलता; मरीज बहुत नखरेबाज (fastidious) हो सकता है।
दर्द: जलन का एहसास जिसे गर्मी से आराम मिलता है। दर्द ऐसा लगता है जैसे लाल-गर्म सुइयां चुभ रही हों।
संवेदनाएं: ऐसा महसूस होना जैसे नसों में बर्फ का पानी दौड़ रहा हो, या रक्त वाहिकाओं (blood vessels) में उबलता हुआ पानी बह रहा हो।
प्यास: बार-बार थोड़ा-थोड़ा ठंडा पानी पीने की इच्छा।
PULSATILLA (पल्सेटिला)

ठंड और गर्मी: छिटपुट ठंड लगना और कुछ ही हिस्सों में ठंड महसूस होना। पीठ में ठंड रेंगती हुई महसूस होती है। गर्म कमरे में भी मरीज को ठंड लगती है। एक तरफा ठंड, गर्मी या पसीना। गर्मी ऐसी महसूस होती है जैसे उस पर गर्म पानी फेंका गया हो।
पसीना और बाहरी कारक: सुबह बहुत अधिक पसीना आना। बाहरी गर्मी बर्दाश्त नहीं होती, और बंद, घुटन भरे कमरे में लक्षण बदतर हो जाते हैं।
राहत: घर के बाहर (खुली हवा में) और धीमी गति से चलने पर आराम मिलता है (ब्रायोनिया और यूपेटोरियम पर्फ के विपरीत)।
लक्षण: घबराहट (palpitations) के साथ चिंता, जिससे मरीज कपड़े उतार फेंकना चाहता है। प्यास और भूख न लगना।
खांसी: रात में सूखी खांसी जो उठकर बैठने पर चली जाती है लेकिन वापस लेटने पर फिर लौट आती है (हायोसायमस के समान)।
मनोदशा: रोने वाला और चिड़चिड़ा स्वभाव।
SULPHUR (सल्फर)

उस मरीज के लिए जो फ्लू से आंशिक रूप से ठीक हो जाता है और फिर से बीमार पड़ जाता है (relapse)।
बार-बार गर्मी के दौरे पड़ना (flushes of heat) और खून में बेचैनी महसूस होना।
खुली हवा और हवा के झोंकों के प्रति बहुत संवेदनशील (पल्सेटिला के विपरीत)। आसानी से सर्दी लग जाती है।
नहाने और धोने के बाद लक्षण बदतर हो जाते हैं।
छाती और सिर: छाती में घुटन, जलन, चुभन और भारीपन। सिर के ऊपरी हिस्से (crown) पर गर्मी जबकि पैर ठंडे रहते हैं।
नींद और पैर: पैरों के तलवों में रात में जलन होती है और उन्हें बिस्तर के कवर से बाहर रखना पड़ता है। दिन में नींद आती है लेकिन रातें बेचैनी भरी होती हैं; अक्सर डरावने सपनों से चौंक कर जाग जाता है।
भूख: बहुत अधिक भूख, सुबह लगभग 11:00 बजे "भूखों मरने" जैसी स्थिति महसूस होना।
इन्फ्लूएंजा के बाद के स्नायु रोग (Neuroses) पर नोट: Cyprepedium (साइप्रिपेडियम) और Scutellaria (स्कुटेलारिया) 30 को फ्लू के बाद होने वाले न्यूरोसिस (स्नायु संबंधी समस्याओं) के लिए अच्छी दवाएं माना जाता है।
गंभीर स्थिति का स्वयं उपचार न करें
इस तरह की स्थितियों में डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ऑनलाइन परामर्श शुरू करें और अपने अनुसार उपचार योजना पाएं।
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